Chirag Jain Writings, Ghazal, Poetry, Unpublished
सूरज जैसा जल के देख
सोच में मेरी ढल के देख
मुझसे तेज़ निकल के देख
अपनी सोच बदल के देख
हाला तेरे अंतस् की
यहाँ-वहाँ न छलके देख
अगुआई क्या होती है
मेरे आगे चल के देख
फिर से तेरी बात चली
फिर से आँसू ढलके देख
राम लिखा और तैर गए
पत्थर होकर हल्के देख
पायल मौन चली आई
होंठ खुले साँकल के देख
याद, मुहब्बत, ख़्वाब, ख़याल
कितने रूप ख़लल के देख
शब्द बदलना छोड़ ‘चिराग़’
अब तू अर्थ बदल के देख
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
नानक, कबीर, महावीर, पीर, गौतम को
पंथ-देश-जातियों का नाम मत दीजिए
जिनने समाज की तमाम बेड़ियाँ मिटाईं
उन्हें किसी बेड़ी का ग़ुलाम मत कीजिए
मन के फ़कीर अलमस्त महामानवों को
रूढ़ियों से जोड़ बदनाम मत कीजिए
प्राणियों के प्रति प्रेम ही प्रभु की वन्दना है
भले किसी ईश को प्रणाम मत कीजिए
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Doha, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
अपने भीतर झाँक ले, अपना हृदय टटोल
सब कुछ तेरे पास है, अपनी आँखें खोल
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghazal, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
हवस की राह चलकर आदमी मायूस होता है
सदा आपे से बाहर आदमी मायूस होता है
कभी मायूस होकर आदमी खोता है उम्मीदें
कभी उम्मीद खोकर आदमी मायूस होता है
न हो उम्मीद तो मायूसियाँ छू भी नहीं सकतीं
हमेशा आरज़ू कर आदमी मायूस होता है
हज़ारों ख्वाब बेशक़ बन्द ऑंखों में पलें लेकिन
पलक खुलने पे अक्सर आदमी मायूस होता है
जहाँ दरकार हो दो घूँट मीठे साफ पानी की
वहाँ पाकर समन्दर आदमी मायूस होता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Muktak, Poetry
किसी का क़द ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
किसी का पद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
कहाँ गहराई है किसकी यही सबको नहीं दिखता
कोई बरगद ज़रा उठ जाए तो सब देख लेते हैं
✍️ चिराग़ जैन