मेरी हिम्मत
निराशा तो मेरी आंखों को नम होने नहीं देगी
मगर उम्मीद मुझको चैन से सोने नहीं देगी
बहुत आसां नहीं होगा मेरे सपनों का सच होना
बहुत मुश्क़िल मेरी हिम्मत इसे होने नहीं देगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
निराशा तो मेरी आंखों को नम होने नहीं देगी
मगर उम्मीद मुझको चैन से सोने नहीं देगी
बहुत आसां नहीं होगा मेरे सपनों का सच होना
बहुत मुश्क़िल मेरी हिम्मत इसे होने नहीं देगी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
कभी मुद्दा, कभी चेहरा, कभी पाला बदलता है
सियासतदां सियासत के लिए क्या-क्या बदलता है
न पूछो वक़्त अपने साथ में क्या-क्या बदलता है
सुबह से शाम होने तक मेरा साया बदलता है
यहाँ हर आदमी उस गाम पर चेहरा बदलता है
जहाँ जाकर मेरे किरदार का ओहदा बदलता है
हुनर का वो भी इक मैयार होता है जहाँ जाकर
हुनर अपने तरीक़े से ही ये दुनिया बदलता है
सुलह हो भी तो आख़िर किस तरह मुमक़िन हो उससे, जो
सफ़ाई सुनने से पहले हर इक शिक़वा बदलता है
मिसालें दी नहीं जा सकतीं सफ़रे-क़ामयाबी की
कि इसका काफ़िला हर दौर में रस्ता बदलता है
कभी शाहों को भी लाचार देखा है बिसातों पर
कभी शतरंज की बाजी कोई प्यादा बदलता है
मरासिम जो बदल पाते नहीं गर्दिश की राहों पर
ग़ज़ब होता है जब उनको भी ये पैसा बदलता है
बहुत देखा शराफ़त के सफ़र पर राहगीरों को
कोई रस्ता बदलता है, कोई हुलिया बदलता है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इतना-सा फ़र्क है
अंधियार और उजियारे में…
…कि अंधियारा
हाथों में उठाकर
किसी को
भेंट नहीं किया जा सकता!
…कि अंधियार को
हाथों में समेटने के लिए
मुट्ठी बंद करनी होती है
और उजियारा
अंजुरी बना देता है
हथेलियों को!
…कि अंधियारा
सीमित करता है
और उजियारा
सीमाओं पर छा जाता है
असीम होकर।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
शहीदों ने लिखी थी कल हमारे नाम आज़ादी
मगर हमने बना डाली है इक इल्ज़ाम आज़ादी
‘ग़ुलामी की ज़दों में ज़िन्दगी दुश्वार होती है’
हमें चुपके से दे जाती है ये पैग़ाम आज़ादी
कमाई से कहीं मुश्क़िल है दौलत की हिफ़ाज़त भी
संभाले रख नहीं पाए कई सद्दाम आज़ादी
घड़ी भर को नज़र चूकी, अंधेरा हो गया ग़ालिब
छिनी दिन की, ज़रा सी चूक से, हर शाम आज़ादी
भला ऐसा हुआ क्या था कि केवल छह महीने में
कोई तेरे हवाले कर गया हे राम आज़ादी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Free Verse, Mann To Gomukh Hai, Poetry
इत्र है हँसी
महक उठता है वो
जिस पर छिड़का जाए
लेकिन
जो छिड़कता है
वो तो
चमक ही उठता है।
✍️ चिराग़ जैन