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होली : एक अवसर

होली; मनुष्य को भीतर से बाहर तक एकरूप कर देने का त्योहार। होली; अलग-अलग रंगों के एकरंग हो जाने का अवसर। होली; शालीनता और नैतिकता के बोझ को किनारे रखकर कुछ क्षण स्वाभाविक हो जाने का पर्व। होली; सभ्यता के आडम्बर से मुक्त होकर सहजता की धारा में डुबकी लगाने का रिवाज़। होली...

रंग में भंग

होली के हुड़दंग में रंग में भंग पड़ गयी इधर ठण्डाई गले से नीचे उतरी उधर भांग सिर पर चढ़ गई भोले की बूटी ने ऐसा झुमाया कि हाथ को लात और सिर को पैर समझ बैठा चूहा भी ख़ुद को शेर समझ बैठा नशे की झोंक में लफड़ा बड़ा हो गया पत्नी के सामने तनकर खड़ा हो गया पत्नी ने आँखें दिखाई तो...

चुनाव के बाद

जीत और हार के शोर-शराबे के बाद यकायक राजनैतिक गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। जीतनेवाले इतने स्पष्ट बहुमत से जीते हैं कि मीडिया के पोस्ट इलेक्शन अलायंस और हॉर्स ट्रेडिंग जैसे कैप्सूल धरे के धरे रह गये हैं। यही स्पष्ट बहुमत वर्तमान लोकतंत्र की दरकार है।...

बिटिया की विदाई

चल पड़ी ससुराल बिटिया सज-सँवर के मन बिलखकर रह गया इस पल अचानक देहरी की आँख नम होने लगी है मौन रहने लग गयी साँकल अचानक याद आता है अभी कल ही हमारी गोद में इक पाँखुरी सी आई थी तुम बस अभी कल ही कोई साड़ी पहनकर देखकर दर्पण बहुत इतराई थी तुम लांघकर बचपन, हुई थी तुम सयानी याद...

गोल-गोल गप्पा

पानी के बतासे, पुचका, गुपचुप, टिकिया और न जाने क्या-क्या नाम हैं इस चटखारे का। हर गली-नुक्कड़ पर कोई चाट का ठेला इस अनोखे व्यंजन के बिना पूरा नहीं होता। सूजी और आटे की छोटी-छोटी करारी पूरियों को फोड़कर उनमें आलू-चने और सोंठ का मसाला भरकर जब तक गोलगप्पे वाला उसे किसी...

कविता की नयी पौध

मुझे प्यार करनेवालों का कहना है कि मैं बहुत अच्छा लिखता हूँ। सुनकर अच्छा लगता है। मेरे अपनों का मानना है कि मैं सबसे अच्छा लिखता हूँ। सुनकर आश्वस्ति होती है कि मेरे पास मुझे ‘अपना’ माननेवाले ख़ूब लोग हैं। मेरे पाठकों का कहना है कि मुझ जैसा कोई नहीं लिख सकता। सुनकर एक...
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