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मोल केवल ध्येय का है

प्रश्न तो उद्देश्य का है, मोल केवल ध्येय का है जो मिला आशीष बनकर, अर्थ उस पाथेय का है मात्र जीने के लिए सब लोग जीकर मर रहे हैं कर्म तो सब कर रहे हैं। कर्म तो सब कर रहे हैं। जो सहजता से नियत पथ पार कर उजियार देगी बस उसी पहली किरण को अर्घ्य का वैभव मिलेगा बादलों के...

समझौता

अपने स्वर्ण सरीखे शब्दों में मैं अगर मिलावट कर लूँ तो चमकीले पत्थर मेरे भी जीवन में जड़ जाएंगे कुंदन जैसे शुद्ध विचारों में कुछ समझौता घुल जाए तो मेरे हित नित्य सफलता के आभूषण गढ़ जाएंगे चंदन कहकर कीकर बेचूँ -लाभ यही है, मंत्र यही है लोभ प्रपंचों की दुनिया में धर्म यही...

बेरोज़गारी का उपाय

यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा जनता के दुःख देखकर जब धरती पे फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो देश के विकास की कमान कौन थामेगा ✍️...

अवसान

सुबह उगे सूरज का ढलना निश्चित है हर शाम रे फिर भी कब रुकते हैं पल भर इस दुनिया के काम रे जिनका जीवन ग्रंथ हुआ था जिनका कीना पंथ हुआ था जो रावण का काल बन गए मानवता का भाल बन गए जिनने दीन अहिल्या तारी जिनने युग की भूल सुधारी जिनके चिन्ह क्षितिज पर ठहरे जिनके तप से पत्थर...

इनबाॅक्स के शुभचिंतक

मेरे हितचिंतको! रोज़ सुबह जब मैं मोबाइल उठाता हूँ तो मेरा व्हाट्सएप्प आपके संदेशों से लदा हुआ होता है। मेरे निरुत्तर रहने के बावजूद आप ‘मा फलेषु कदाचन’ का अनुगमन करते हुए बिना मतलब की ‘गुड मॉर्निंग’ भेजना नहीं भूलते। मेरे शुभाकांक्षियो, आपके द्वारा भेजे जा रहे लाल-पीले...

गणतंत्र दिवस

आज राजपथ पर महाराष्ट्र की झाँकी निकली तो महाकवि भूषण के घनाक्षरी से पूरा वातावरण काव्यमय हो गया। अभी भूषण की धमक गूंज ही रही थी कि छत्तीसगढ़ की झाँकी महाकवि कालिदास की विशाल मूर्ति और मेघदूत के श्लोकोच्चार के साथ पुनः कविता का जयघोष करती निकल गई। कल गणतंत्र दिवस की...
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