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सारी उम्र जाम में

दादाजी की राम-राम में बीत गई बाबूजी की काम-धाम में बीत गई हमें तेज़ रफ़्तार सुहाई शहरों की फिर भी सारी उम्र जाम में बीत गई ✍️ चिराग़...

सूरज को चेतावनी

किरणों के बूते गहरा अंधियार मिटाना नामुमकिन है दिनकर अब तुमको ख़ुद ही अंधियारे बीच उतरना होगा युग-युग से तुम जिन घोड़ों के रथ पर थे असवार दिवाकर! उनका चाल-चलन भी जाँचो अब फिर से इक बार दिवाकर! इनके चारे की थैली पर अंधियारे के चिन्ह मिले हैं इनकी हर हरक़त पर तुमको पूरा...

पीछे छूट गए

कुछ गीतों के प्लॉट अधूरे पीछे छूट गए फ्यूचर के सब थॉट अधूरे पीछे छूट गए संबंधों की स्नेह आर्टरी की ब्लॉकेज हटी बने रहे जो क्लॉट अधूरे पीछे छूट गए अनुभव और आकलन से जो सोच बनी वो छूटी युग की क्यारी में महकेंगी दो गीतों की बूटी गमले, हैंगर, पॉट अधूरे पीछे छूट गए कुछ...

प्रमोद तिवारी जी के निधन पर

कवि सम्मेलन के सफर में फिर से दो साथी ज़ंजीर खींच कर बीच में ही उतर गए। रायबरेली से कानपुर लौटते हुए एक बार फिर रात के तीसरे पहर का अंधेरा हमसे हमारे दो कवियों को छीन ले गया। यादों के चुलबुले गीतकार श्री प्रमोद तिवारी एक ही झटके में हमारा साथ छोड़ गए। उनके साथ श्री के...

मीडिया में कवि सम्मेलन

हिंदी कवि-सम्मेलन भारतीय समाज में एक परंपरागत संचार माध्यम के रूप में प्रतिष्ठापित है। आधुनिक और अत्याधुनिक माध्यमों के प्रचलन से पूर्व ही कवि-सम्मेलनों ने भारतीय जनमानस में गहरी पैंठ बना ली थी। समय के साथ काव्यमंचों पर रासानुपत में परिवर्तन अवश्य हुए किन्तु ये सब...

प्रह्लाद जीवित है

हार भी है, जीत भी है पीर भी है, प्रीत भी है अनवरत इक शोर भी है आपदा घनघोर भी है किन्तु अन्तस् में अमर आह्लाद जीवित है होलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है मानता हूँ उत्सवों का दौर थोड़ा कम हुआ है आंधियों से आम्रवन का बौर थोड़ा कम हुआ है किन्तु कलरव ने चहकने की प्रथा...
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