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बुलंदशहर बलात्कार कांड

फट गया कलेजा धरती का आकाश हिला दिग्गज डोले ममता की कोरें बिलख उठीं पत्थर पिघले, पर्वत बोले फिर क्यों ऐसा कुछ नहीं हुआ जो हवस की तंद्रा तोड़ सके ऐसी आंधी क्यों नहीं उठी जो वहशत को झखझोर सके मजबूर पिता की चीखों से अम्बर तक चोट हुई होगी लाचार बिलखती बेटी जब बर्बर ने हाय...

ओके साहब!

साहब जी, बिहार में चुनाव होने वाला है, क्या करें? गाय का मुद्दा खड़ा करो। ओके साहब। साहब जी, दिल्ली में चुनाव होने वाला है, क्या करें? फ्री वाई-फाई बांटने का प्रचार करो। ओके साहब। साहब जी, पंजाब में चुनाव होने वाला है, क्या करें? ड्रग्स की समस्या को भड़का दो। ओके साहब।...

रे बुलंदशहर!

रे बुलंदशहर! इतनी बुलंदी तैने कहाँ से पाई कि अपनी बेटी के बलात्कार को अपनी आँखों से देखने वाले बाप की चीत्कार से तेरा कलेजा नहीं काँपा। उस माँ की चीख तुझे सुनाई नहीं दी जिसे समझ नहीं आ रहा था कि अपनी देह पर लिपटे दरिंदों की आँखें पहले फोडूं या अपनी 13 साल की बेटी के...

जीवन नदिया

जीवन का प्रारम्भ जब होता है, तो वह नदिया की सद्यप्रवाहित धारा-सा अविरल और निष्कलंक होता है। उसकी कलकल मनमोहक होती है। उसका स्पर्श शीतल होता है। ज्यों-ज्यों धारा आगे बढ़ती है, त्यों-त्यों उसका आकार बढ़ता जाता है। गुडलने चलने के प्रयास में बचपन के घुटने मैले हो जाते हैं,...
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