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थाने में फिर कभी न आना

चुन्नू-मुन्नू थे दो भाई प्रॉपर्टी पर हुई लड़ाई चुन्नू बोला मैं भी लूंगा मुन्नू बोला कभी न दूंगा झगड़ा सुनकर जिप्सी आई दोनों को थाने ले आई थोड़ा तू दे चुन्नू बेटा थोड़ा तू दे मुन्नू बेटा थाने में फिर कभी न आना अपना झगड़ा खुद निपटाना ✍️ चिराग़...

मेरी ख़ामुशी पहचानो

अब उनका इंतज़ार छोड़ भी दो शानो तुम ख़ुदकुशी कर लो कहीं अब मिरे अरमानो तुम जुबां से कुछ न कहूँगा कभी, ये जानो तुम जो हो सके तो मेरी ख़ामुशी पहचानो तुम अब अपने बीच नहीं है वो मरासिम क़ायम कि ख़ुद को मेरी उदासी की वजह मानो तुम कभी तो दुनिया से मतलबपरस्ती भी सीखो सदा दीवाने...

मित्रता के संस्कार

बचपन में हमें सुनाई गई दादी-नानी की कहानियों में दोस्ती को कभी अच्छी नज़र से देखने की परम्परा नहीं रही। यदि कभी किसी कहानी ने बन्दर और मगरमच्छ में दोस्ती करवाई भी तो उसके सद्भाव को अंततः मगरमच्छ की धूर्तता के हलक़ में उतर जाना पड़ा। एकाध बार शेर और चूहे की असंभव दोस्ती...

मित्रता

सुदामा जैसा मित्र मुझे नहीं चाहिए जो बचपन में मित्र के हिस्से के चने खा गया और जवानी में मित्रता का हिस्सा मांगने आ गया कृष्ण जैसा मित्र भी मुझे नहीं चाहिए जो बचपन में मित्र की चालाकी पर प्रतिकार किया और जवानी में मित्र के गिड़गिड़ाने का इंतज़ार किया मित्रता तो दुर्योधन...

दोस्त वो है

दोस्त वो नहीं जिसका आपके पास फ्रेंडशिप डे का सबसे पहला मेसेज आए। दोस्त वो जो फ्रेंडशिप डे के दिन आपसे फोन मिलाकर बोले – “साले तूने मुझे याद क्यों नहीं दिलाया कि आज फ्रेंडशिप डे है, कमीने तेरी भाभी को रात 12 बजे wish नहीं कर सका।” और भी गहरा दोस्त वो...
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