जो सुख की मंज़िल पर छोड़ें
वो राहें आसान नहीं हैं
शायद लफ़्ज़ों के ही पर हों
दीवारों के कान नहीं हैं
बस मेरी परवाह नहीं की
वैसे वो नादान नहीं हैं
उनको इस पर हैरानी है
-हम बिल्कुल हैरान नहीं हैं
✍️ चिराग़ जैन
जो सुख की मंज़िल पर छोड़ें
वो राहें आसान नहीं हैं
शायद लफ़्ज़ों के ही पर हों
दीवारों के कान नहीं हैं
बस मेरी परवाह नहीं की
वैसे वो नादान नहीं हैं
उनको इस पर हैरानी है
-हम बिल्कुल हैरान नहीं हैं
✍️ चिराग़ जैन
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