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विभक्त

सृजन की जाह्नवी विभक्त होकर भी गंगा ही रहेगी। तुम देखना उन्मुक्त बहती संवेदना से विभक्त होती धार मोक्षदायिनी होकर पुजेगी …हर की पौड़ी पर। कविता से विभक्त काव्यांश सूक्ति हो जाते हैं और श्लोक से विभक्त वर्ण मंत्र बन जाते हैं। एक सृजन ही तो है जहां विभक्तियां...

प्यार का सम्प्रेषण

चीखने से शोर बढ़ता है सम्बन्ध नहीं। सुकून की खटिया बुनी जाती है सहजता की बाण से; इसमें प्रयास की गाँठें हों तो मुक्त नहीं हो सकती नींद चुभन से! जताना और बताना व्यापार में होना चाहिए व्यवहार में नहीं। और प्यार में… …वहाँ तो आँखें मिलते ही फिफ्थ गीयर लग जाता...

संतोष

बूंद भर जल नहीं दो भले तुम मुझे दीखते ही रहो बस घड़ों की तरह क्या हुआ गर कभी प्यास बाकी रही ज़िन्दगी चुक गई आस बाकी रही जिन ज़मीनों की अरदास बाकी रही खोखली हो गई बीहड़ों की तरह मंडियों में सजाया हुआ नेह हूँ मैं शपथ में बसा एक संदेह हूँ वक़्त के हाथ जर्जर हुई देह हूँ बस...

सेंसर बोर्ड

पहलाज निहलानी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हैं; इस हेतु उन्हें अपने दायित्व के निर्वाह हेतु सख्त होना पड़ेगा ही। भारत के दर्शकों को अश्लीलता से बचाना, अन्धविश्वास से बचाना उनका दायित्व है और भारत के लोगों अथवा समूहों की भावनाएं आहत न हों; यह देखना उनका काम है। किन्तु चूँकि...

बहुत आसां नहीं होता

कोई जब लौट कर आए तो उसकी आबरू रखना बहुत आसां नहीं होता है फिर से लौट कर आना ✍️ चिराग़ जैन
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