+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

क्षोभ के वातावरण में

सभ्यताओं के क्षरण में क्षोभ के वातावरण में वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा व्यस्तताओं को हृदय का भान कमतर ही रहेगा मुद्रिका में प्रेम का क्षण तो सहेजा जाएगा पर भूल जाएगा मिलन के सौख्य को दुष्यंत इक दिन प्रीति की उजड़ी हुई क्यारी पुनः पुष्पित न होगी हर कथा है...

वैदेही वनवासी है

रघुपति राघव के चेहरे पर गहरी आज उदासी है अवधपुरी में उत्सव है पर वैदेही वनवासी है राजसूय के आयोजन का वैभव आज पधारा है इक राघव के मन से बाहर हर कोना उजियारा है गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़े, शुभ-मंगल और छप्पन भोग राम समझते हैं क्षणभंगुर हैं ये सब के सब संयोग जनकसुता का प्रेम...

मोल केवल ध्येय का है

प्रश्न तो उद्देश्य का है, मोल केवल ध्येय का है जो मिला आशीष बनकर, अर्थ उस पाथेय का है मात्र जीने के लिए सब लोग जीकर मर रहे हैं कर्म तो सब कर रहे हैं। कर्म तो सब कर रहे हैं। जो सहजता से नियत पथ पार कर उजियार देगी बस उसी पहली किरण को अर्घ्य का वैभव मिलेगा बादलों के...

समझौता

अपने स्वर्ण सरीखे शब्दों में मैं अगर मिलावट कर लूँ तो चमकीले पत्थर मेरे भी जीवन में जड़ जाएंगे कुंदन जैसे शुद्ध विचारों में कुछ समझौता घुल जाए तो मेरे हित नित्य सफलता के आभूषण गढ़ जाएंगे चंदन कहकर कीकर बेचूँ -लाभ यही है, मंत्र यही है लोभ प्रपंचों की दुनिया में धर्म यही...

बेरोज़गारी का उपाय

यौवन के हाथ करछी-कड़ाही में घिरे तो सीमाओं पे शत्रुओं के बान कौन थामेगा चटनी के स्वाद चखने लगी जवानी गर बैरियों की तिरछी जुबान कौन थामेगा जनता के दुःख देखकर जब धरती पे फटने लगेगा आसमान; कौन थामेगा देश के युवा यदि पकौड़े बेचने लगे तो देश के विकास की कमान कौन थामेगा ✍️...

अवसान

सुबह उगे सूरज का ढलना निश्चित है हर शाम रे फिर भी कब रुकते हैं पल भर इस दुनिया के काम रे जिनका जीवन ग्रंथ हुआ था जिनका कीना पंथ हुआ था जो रावण का काल बन गए मानवता का भाल बन गए जिनने दीन अहिल्या तारी जिनने युग की भूल सुधारी जिनके चिन्ह क्षितिज पर ठहरे जिनके तप से पत्थर...
error: Content is protected !!