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महलों में वनवास

अकथ वेदना करती होगी रह-रहकर परिहास उर्मिल ने बिन कारण भोगा महलों में वनवास धीर धरो मैया वैदेही अनगिन झेले कष्ट भले ही मृग आकर्षण में अंकुर थे स्वर्ण नगर की पीड़ा के ही पल भर का सम्मोहन लाया जीवन भर का त्रास उर्मिल ने बिन कारण भोगा महलों में वनवास हर इक सुविधा द्वार पड़ी...

आदमी की ज़िंदगी

आदमी की ज़िंदगी ईवेंट मैनेजमेंट है मौत उसकी ज़िन्दगी का आख़िरी ईवेंट है साँस रहने तक जियोगे, ये तो अग्रीमेंट है किस तरह जीना है अब ये आपका टैलेंट है ✍️ चिराग़...

प्यास ठहरी है

रेत का साम्राज्य है बस हो चुके हैं घाट बेबस पर्वतों पर जल नहीं है दूर तक बादल नहीं है चल रहे हैं रेत पर, तपती दुपहरी है एक युग से प्यास ठहरी है पत्थरों के आख़िरी कण तक नहीं है बून्द जल की याद रख पाए नमी को इस जतन में आँख छलकी आँख के नीचे बची है शेष, झरनों की निशानी...

इतनी भी नाराज न होना

अभी गुलाबी रंगत वाले फूल नहीं मुरझाए होंगे अभी मेज से तुमने मेरे तोहफे नहीं हटाए होंगे अभी फोन में मेरा नम्बर उसी नाम से दर्ज मिलेगा अभी गैलरी में केवल मेरे फोटो का सर्च मिलेगा तुम तक मेरा प्यार न पहुँचे, तुम ऐसी परवाज न होना इतनी भी नाराज न होना प्यार भरे पल याद आएं...

पूरी राजनीति हो गई मवाली

पूरी राजनीति हो गई मवाली, सभी के सब जाली हैं होली के रंग रसिया एक-दूसरे को मार मार ताली, सुनावें रोज़ गाली ये ठीक नहीं ढंग रसिया अभी चाय का शोर थमा था, तभी पकौड़ा आ पहुंचा देसी गदहे नहीं चले तो, अरबी घोड़ा आ पहुंचा नरसिम्हा से मुक्त हुए तो देवेगौड़ा आ पहुंचा पहला पकड़ा...

निर्माण-प्रक्रिया

टूट कर बिखरे हुए व्यक्तित्व पर आँसुओं ने कर दिया छिड़काव गूंद डाला मुट्ठियों से भाग्य ने हो गईं सब ग्रंथियाँ समभाव अनुभवों में सन गईं जब कर्म की दोनों हथेली तब समय के चाक पर निस्तेज ने आकार पाया उंगलियों ने दाब दे-देकर दुलारा पोरवों से तब कहीं संज्ञा हुई हासिल, तभी...
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