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चुभन

उथल-पुथल सी मची हुई है हल जीवन को रौंद रहा है शायद ईश्वर की आँखों में फिर से सावन कौंध रहा है जितना ज़्यादा जोता जाए, उतना सृजन निराला होगा जब-जब खेत चुभन झेलेगा, तब-तब ही हरियाला होगा मिट्टी के कण-कण को निर्मम, दो बैलों के खुर कूटेंगे फाल निरंतर चोट करेगी, परतों के...

शिखरों के आँसू

शिखरों के तो आँसू भी मीठी नदी बनकर प्यास के ओंठ तर करने के काम आते हैं। ✍️ चिराग़ जैन

शिक्षकों की परछाईं

जब हम शिक्षा ग्रहण कर रहे होते हैं, तब शिक्षकों का ख़ूब उपहास करते हैं। कोई ऐसा शिक्षित न मिलेगा जिसने अपने शिक्षकों के विकृत नामकरण न किये हों। किन्तु जब हम संघर्ष की वीथियों पर चलते हैं, तब उन्हीं शिक्षकों के सामान्य व्यवहार में उच्चरित वाक्य हमारी समस्याओं का...

क्षमा : एक पर्व

क्षमावाणी मनुष्य इतिहास का सर्वाधिक वैज्ञानिक पर्व है। यह मनुष्यता के लिए सबसे आवश्यक त्योहार है। ‘क्षमा’ मानव के चरित्र निर्माण का सर्वाधिक प्रबल यंत्र है। क्षमादान कठिन है किन्तु क्षमायाचना उससे भी अधिक कठिन है। क्षमा करनेवाले के पास कहीं न कहीं बड़प्पन का कोई अहंकार...
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