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गुनाहों का एहतराम

दिल में उग आए गुनाहों का एहतराम करें काम यूँ झूठे दिखावे का हम तमाम करें बाद मरने के क़सीदे तो पढ़ेंगे सब ही लोग कुछ हों, जो हमें जीते जी सलाम करें ज़ीस्त! हम कर चुके जो तेरे साथ करना था मौत अब आ मरे तो उसका इंतज़ाम करें इस तरह अक़्ल पे तारी हो नश्अ बोतल का वाइज़ आए कोई...

मेरे गीत उधार रहेंगे

सपनों का विस्तार रहेंगे आँसू की मनुहार रहेंगे युग-युग तक सारी दुनिया पर, मेरे गीत उधार रहेंगे जिन शब्दों से कर्ज़ा लेकर, भावों की झोली भरता था रोते-रोते जिस पीड़ा के माथे पर रोली धरता था उस पीड़ा का सार रहेंगे भाषा का श्रृंगार रहेंगे शब्दों की नश्वर काया में, प्राणों का...

एक ख़ालिस कवि का जीवन

नीरज जी ने जब भी नज़र उठा कर देखा तो उनकी अदा दिल पर छप गई। उन्होंने अपनी भारी आवाज़ में कुछ आदेश कर दिया तो लगा कि हम धन्य हो गए। नीली लुंगी और जेब वाली बनियान पहने जब वे लोगों को सम्मोहित करते दिखते थे तब महसूस होता था कि कोई फकीर अपनी अल्हड़ मस्ती में हम नए साधकों को...

गोपालदास नीरज जी के निधन पर

ये निशा आज फिर नीरज-निशा कहाएगी बस क्षोभ यही; इसमें अब वैसा नूर नहीं ग़ज़लें बाक़ी हैं, गीत बचे हैं अनगिन पर ये आज तुम्हारे स्वर सुख से भरपूर नहीं तुम गीत नहीं रचते थे, जादू करते थे दर्शन की देहरी पर श्रृंगार सजाते थे रस की गगरी के चातक बड़े छबीले थे शब्दों की टोली से...

दोतरफ़ा पोषण

मैं अपनी हर जीत भुला दूँ, तुम बिसरा दो हार को दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को जब धरती ने हरियाली का रूप सजाना छोड़ दिया तब अम्बर ने बादल लेकर आना-जाना छोड़ दिया कोई तो आकर्षण मिलता सावन की बौछार को दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को दिन की हर तारीफ़...
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