+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

आसान नहीं है कविता लिखना

माली ने माला बनानी चाही झखझोरी गईं डालियाँ . बेन्धे गए फूल लदता रहा धागा। शिल्पी ने मूर्ति गढ़नी चाही टूटते रहे पत्थर घिसती रही छैनी चीखती रही हथौड़ी। माँ ने रोटी सेंकनी चाही पीसा गया गेहूँ गूंदा गया आटा जलता रहा तवा। कवि ने कविता लिखनी चाही तो शब्द अपने अर्थों में सिमट...

फूल का क़त्ल

हार का ख़ौफ़ गुनहगार बना देता है जीत की चाह कभी वार नहीं कर सकती हाथ वहशत की ग़ुलामी पे अड़े थे, वरना फूल का क़त्ल तो तलवार नहीं कर सकती बेच दी होगी चकाचौंध में ग़ैरत उसने भूख इंसान को ग़द्दार नहीं कर सकती रौशनी नूर तो आलम पे लुटा सकती है पर अंधेरे को गिरफ़्तार नहीं कर सकती...

भारतीय राजनैतिक परिप्रेक्ष्य एक अस्थिर युग

भारतीय राजनैतिक परिप्रेक्ष्य एक अस्थिर युग की ओर बढ़ रहा है। मोदी सरकार के विरुद्ध एकजुट हो रहे क्षेत्रीय दलों का उद्देश्य यदि देश का विकास करना रहा होता तो सम्भवतः आशा की किरण फूट सकती थी, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है। शासन के लोभ में विचारधारा तक को दरकिनार कर देने...

अटल बिहारी वाजपेयी जी के महाप्रयाण पर

भारत का योग्य सपूत गया मानवता का अवधूत गया नैतिकता का क़िरदार गया हिम्मत का लम्बरदार गया संसद का उन्नत भाल गया भारत माता का लाल गया इक अद्भुत इच्छाशक्ति गई सद्भावों की अनुरक्ति गई जनहित का अथक प्रयत्न गया भारत का अनुपम रत्न गया दुनिया से बाज़ी मार गया युग “अटल...

ये संसार रहेगा

प्रीति रहेगी, प्यार रहेगा, जीवन का विस्तार रहेगा हम सब कुछ दिन बाद न होंगे, लेकिन ये संसार रहेगा सन्नाटे से शोर उगेगा, शोर पुनः सन्नाटा होगा मंदी होगी, तेज़ी होगी, लाभ रहेगा, घाटा होगा सारे सौदागर मर जाएँ, फिर भी ये बाज़ार रहेगा हम सब कुछ दिन बाद न होंगे, लेकिन ये संसार...
error: Content is protected !!