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वो निर्णय किस काम का

सब बातों पर ध्यान न देना हर निंदा को कान न देना इक पल की इच्छा पूरी कर इक युग को अपमान न देना धोबी ने कब आकर पूछा हाल अकेले राम का जो जीवन भर की पीड़ा दे, वो निर्णय किस काम का जग की निंदा से चिंतित हो, कोख जने को तज दोगे क्या रश्मिरथी के उज्ज्वल पथ पर, मन भर पीड़ा रच...

आँसू की आवाज़

सारे ही सुख थे बगिया में, फिर क्यों तुमने पीर चुनी है क्या तुमने भी तन्हाई में, आँसू की आवाज़ सुनी है क्या तुमने भी महसूसा है, एकाकी हो जाना जग में क्या तुमने जी भर भोगा है, सब अपने खो जाना जग में क्या तुमने भी भावुकता को लुट कर मरते देख लिया है क्या तुमने भी अपनेपन का...

हर सम्भव के साधन हैं

सपनों की आँखें पथराईं हिम्मत की पाँखें कुम्हलाईं संघर्षों की तेज पवन ने प्राणों की शाखें दहलाईं इन सारे झंझावातों से लोहा लिया ज़मीर ने अमृत सोख लिया रावण का राघव के इक तीर ने राजतिलक की शुभ वेला में राघव को वनवास मिला स्वर्ण जड़ित आभूषण उतरे, जंगल का संत्रास मिला...

घर उससे नाराज़ रहा है

जिसकी छाया में आँगन ने अपना हर त्यौहार मनाया जब उस पर पतझर आया तो घर उससे नाराज़ रहा है जिसके फूलों की ख़ुश्बू ने घर का हर कोना महकाया उसके सूखे पत्तों पर झल्लाना एक रिवाज़ रहा है जिस नदिया ने जीवन सींचा, वो बरसातों में अखरेगी बारिश का मौसम बीता तो, छतरी हमको बोझ लगेगी...

तुलसी बाबा के वंशज

कविता को आसान बनाकर जन-जन तक पहुँचाने वाले तुलसी बाबा के वंशज हैं, हम मंचों पर जाने वाले मेले, गाँव, गली, चौबारे, संसद, देश, विदेश विचरते चिंता की त्यौरी पिघलाकर, ओंठों पर मुस्कानें धरते एक ठहाके के जादू से पीड़ा को ग़ायब कर देते हर अंधियारे की झोली में आशा का सूरज धर...
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