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संघर्ष का जयगान

लड़ते-लड़ते हार गया था कल जो सूरज अंधियारे से उसकी एक किरण से गहरे अंधकार की मौत हो गई मस्तक की त्यौरी बन जाती थी जिस विष का नित्य ठिकाना इक मुस्कान खिली तो उस सारे विकार की मौत हो गई जिस रिश्ते को छोड़ गए थे निर्जन वन में निपट अकेला जिसको अपनेपन से ज़्यादा भाया दुनिया...

द्यूतक्रीड़ा

फिर से द्यूत सजा बैठा है फिर बदले शकुनि ने पासे फिर से चूक हुई विदुरों से फिर हैं पाण्डव मौन-रुआंसे मानवता की मर्यादा का फिर से आज क्षरण जारी है मूकदर्शकों के प्रांगण में फिर से चीरहरण जारी है प्रलय-समर फिर द्वार खड़ा है, पूरी है तैयारी रण की फिर पांचाली चीख रही है,...

शांति का अवसर

भाग जाने दो कन्हैया युद्ध भू से अर्जुनों को यह पलायन ध्वंस के जयघोष से कितना बड़ा है मत मनाओ यूँ समझ लो शांति का अवसर खड़ा है मोहवश कोई धनंजय कीर्ति को तजने लगे तो छोड़कर गाण्डीव जो हरिनाम ही भजने लगे तो उस समय उस त्याग की अनुगूंज का सम्मान कर लो इस पराभव से बचेगा क्या...

दिल्ली के मुख्यमंत्री के नाम एक खुला पत्र

श्री मान अरविंद केजरीवाल जी मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार सरजी! हमें इस बात का भान है कि आप जब से सरकार में आए हैं, तब से पूरी क़ायनात आपके खि़लाफ़ हो गई है। पूरे देश की राजनीति, नौकरशाही और व्यवस्था सिर्फ इसी प्रयास में है कि आपको कुर्सी से कैसे हटाया जाए। स्वयं...

प्रश्न पूछना पाप है

साहब ने शतरंज की चाल चली। चार-पाँच चाल चलने के बाद, साहब हारने लगे। आँख बचाकर शतरंज की टेबल से उठकर, वे लूडो खेलने लगे। देश शतरंज को भूल गया और लूडो देखने लगा। थोड़ी देर बाद लूडो में भी साहब की सारी गोटियाँ पिट गईं। देश साहब की बुद्धिमत्ता पर लगाने के लिए प्रश्नचिन्ह...

सपनों की शोकसभा

समय मिले तो तुम भी आना दो झूठे आँसू टपकाने हमने जो मिलकर देखे थे, उन सपनों की शोकसभा है तुम जिनका तर्पण कर आए जीवन नदिया की धारा में जो आँखों में ठहर गए थे, उन लम्हों की शोकसभा है जिनसे फिल्टर हो जाते थे, कड़वाहट के सब कीटाणु सबसे पहले अपनेपन की दोनों किडनी फेल हुई हैं...
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