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कवि प्रदीप

भारतीय सिनेमा की बुनियाद में जो नगीने जड़े हुए हैं, उनमें कवि प्रदीप भी एक हैं। जिन दिनों स्वाधीनता संग्राम चरम पर था, तब भारतीय सिनेमा भी राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग गया था। जनता में राष्ट्रभक्ति का ज्वार भरने के लिए सिनेमा ब्रिटिश हुक़ूमत के खि़लाफ़ मुखर हो उठा। सन...

वक़्त

दिल बच्चा है; सपनों के संग पिकनिक करता रहता है बूढ़ा एक दिमाग़ हमेशा चिकचिक करता रहता है वक़्त; जिसे तुम पूरी दुनिया का सरताज समझते हो मेरी इक दीवार घड़ी में टिकटिक करता रहता है ✍️ चिराग़...

एक सवाल था

एक सवाल था। अनदेखी की गोद में पलकर बड़ा हुआ, और लापरवाही की उंगली पकड़ कर धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ा हुआ। जैसे ही सवाल पर यौवन का ज्वार चढ़ा, वह अपना समाधान ढूंढने निकल पड़ा। समाधान की चाह में, उसे कुछ दोस्त मिल गए राह में। समाजसेवा ने उसे आवारागर्दी की लत लगाई, राजनीति...
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