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शंकर

जो जीवन को तीर्थ बना ले तीर्थंकर हो जाता है क्रोध चढ़े सिर पर तो मानव प्रलयंकर हो जाता है जग की पीर पचाकर जग का हित कर पाना मुश्किल है जो विष पीकर भी जीवित हो, वो शंकर हो जाता है ✍️ चिराग़...

सच और विकास के बीच दीवार

एक वर्ग है जो दीवार के पीछे बनी झुग्गियों पर प्रश्न पूछना चाहता है। दूसरा वर्ग है, जो झुग्गियों के आगे बनी दीवार को विकास समझ कर झुग्गी के प्रश्न पूछने वालों को राष्ट्रद्रोही कह रहा है। ✍️ चिराग़ जैन Ref : Donald Trump’s India...

लोकतन्त्र की नयी परिभाषा

भारतीय लोकतंत्र अपने सर्वाधिक वैभवशाली दौर से गुज़र रहा है। एक राजनैतिक दल ने जनता को बिजली-पानी मुफ़्त देने का ब्लूप्रिंट दिया। दूसरे राजनैतिक दल ने आटा फ्री बाँटने की घोषणा की। एक समय था जब चुनाव जीतने के लिए शराब, पैसा, सिलाई मशीन, साइकिल, लैपटॉप और साड़ियाँ बाँटी...

दिल्ली के चुनाव परिणाम

चुनाव आयोग इस बात पर एक्शन ले कि केजरीवाल ने यह बात छुपाए रखी कि मुहल्ला क्लीनिकों में बीजेपी का इलाज किया जा रहा है झाड़ू को धुआँदार सफ़ाई की बधाई कमल को कुछ नई पाँखुरियाँ खुलने की बधाई और हाथ को हाथ न हिलाने की बधाई ✍️ चिराग़ जैन Ref : Delhi Election...

मतदान क्यों ज़रूरी है

राजनीति किसी भी दल की हो, उसकी बदतमीज़ी जनता की निष्क्रियता के बल पर ढिठाई बनने लगती है। भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान स्वरूप में ‘मतदान’ ही एकमात्र अस्त्र है जो जनता के पास है। शेष तंत्र से हताश होकर इस अस्त्र को भी नष्ट कर देना, भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा देने जैसा है। जिस...
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