हम हैं हिंदी कविता की बुनियाद में गड़ने वाले लोग
कहीं बहुत जमने वाले और कहीं उखड़ने वाले लोग
कवि-सम्मेलन पर मजमेबाज़ी का तमगा मत टाँको
मंचों पर भी मिल जाते हैं, लिखने-पढ़ने वाले लोग
✍️ चिराग़ जैन
हम हैं हिंदी कविता की बुनियाद में गड़ने वाले लोग
कहीं बहुत जमने वाले और कहीं उखड़ने वाले लोग
कवि-सम्मेलन पर मजमेबाज़ी का तमगा मत टाँको
मंचों पर भी मिल जाते हैं, लिखने-पढ़ने वाले लोग
✍️ चिराग़ जैन
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