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दो साल बाद कवि सम्मेलन

दो साल के घनघोर निठल्लेपन के बाद मुझे कवि-सम्मेलन का आमंत्रण मिला तो मैं फूला नहीं समा रहा था। सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल न होता तो उस दिन मेरा आयतन दो गज की सीमा को पार कर गया होता। जिस मोबाइल की घण्टी से भी रेमडिसिवर की बदबू आने लगी थी, उससे फिर से होटल से उठाए हुए...

कोरोना में अवसर

कोरोना की दूसरी लहर बीत चुकी है, लेकिन राजनीति में ख़ुशी की लहर नहीं आई। वे अब भी आपस में लड़ रहे हैं। जब देश में कोरोना का ताण्डव चल रहा था तो पॉलिटिकल पार्टियों में इस बात पर लड़ाई थी कि ये जनता तुम्हारी है, इसे तुम बचाओ। अब जब ताण्डव शान्त हुआ है तो हर पार्टी यह...

ऐसी-तैसी हो गयी

तुमने कैसी फसल लगाई, सत्ता कैसी हो गयी पूरे लोकतंत्र की भाई, ऐसी तैसी हो गयी बीजेपी ने जीएसटी का खेल खिलाया ऐसा बाज़ारों की लुटिया डूबी, बगलें झाँके पैसा ये जीएसटी तुमसे पाई, ऐसी तैसी हो गयी जिस ईवीएम के घपले को कोस रहे कांग्रेसी अब उसके नुक़सान उठाओ, इसमें लज्जा कैसी...

धरना दिया किसानों ने

दिल्ली के द्वारे आकर जब धरना दिया किसानों ने करवट तो बदली ही होगी, सरजी के अरमानों ने भीड़ जुटी तो आँखों में फुलझड़ियां छूट रही होंगी हाथों में खुजली, मन में झुरझुरियाँ फूट रही होंगी अपनापन-सा दिखता होगा लाठी छाप निशानों में करवट तो बदली ही होगी, सरजी के अरमानों ने दिल...

धरना पुरुष

सर जी से कह दो देश में धरने का मौसम धरने का मौसम आ गया जंतर-मंतर पे शोरगुल करने का मौसम करने का मौसम आ गया सड़कों पे बहारें आई है फिर बिल की बदली छाई है धरनों के चरणों में तुमने दिल्ली की सियासत पाई है पीएम की कुर्सी बाँह में भरने का मौसम भरने का मौसम आ गया हे रायते के...
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