+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

तू भी सब-सा निकला

जो जितना भी सच्चा निकला वो उतना ही तनहा निकला सुख के छोटे-से क़तरे में ग़म का पूरा दरिया निकला कुछ के वरक़ ज़रा महंगे थे माल सभी का हल्का निकला मैंने तुझको ख़ुद-सा समझा लेकिन तू भी सब-सा निकला कौन यहाँ कह पाया सब कुछ कम ही निकला जितना निकला ✍️ चिराग़...

नए नग़मे सजा लेना

मैं जहाँ भी रहूँ मुझको ख़ुशी मिल जाएगी बस मेरे गीत गुनगुना के मुस्कुरा देना जब मेरे गीत इस जहान के काबिल न रहें नए नग़मे सजा लेना मुझे भुला देना ✍️ चिराग़...

गीत गढ़ने का हुनर

मसख़रों की मसख़री अपनी जगह शायरों की शायरी अपनी जगह गीत गढ़ने का हुनर कुछ और है मंच की बाज़ीगरी अपनी जगह ✍️ चिराग़...

बावरा कवि

हँसने के लिए कारणों का मोहताज नहीं, आँसुओं का ख़ूब अनुभवी हो गया हूँ मैं सारी दुनिया को आज अपना-सा लगता हूँ, अपनों के लिए अजनबी हो गया हूँ मैं झूठ-अनाचार-बेईमानी की बदलियों में, सच के रवि की कोई छवि हो गया हूँ मैं बावरेपने में घूमता हूँ दुनिया को भूल, तब लगता है एक कवि...

जीवन को कुछ यूँ जियो

बात यहीं से हो शुरू, और यहीं हो बन्द जीवन को कुछ यूँ जियो, जैसे दोहा छन्द ✍️ चिराग़ जैन
error: Content is protected !!