+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

सरकार चल रही है

जो ख़ास हैं उन्हीं की अब दाल गल रही है और आम आदमी की टोपी उछल रही है सब चोर हैं सदन में- अख़बार बोलता है फिर भी ग़ज़ब है उनकी, सरकार चल रही है ✍️ चिराग़...

मेला बरसात में

उठ जा रे देख सुबह से बरस रहा है रामजी। ….बेमौसम ….झमाझम। मुझे चिंता हुई रामलीलाओं का क्या होगा? और अधबने रावण के पुतले… …वो तो भीग गए होंगे। देखने गया तो पाया सब कुछ भीग गया था रामलीला का मंच रावण का दरबार ऋष्यमूक पर्वत दंडक वन पर्णकुटी पुष्पक...

पाठ्य पुस्तक से मुठभेड़

दिल्ली विश्वविद्यालय में नये पाठ्यक्रम लागू हो गये हैं। चार साल वाला। कल स्नातक स्तर की हिंदी की पाठ्य पुस्तक से मुठभेड़ हो गयी। कहने लगी मैं साहित्य की पुस्तक हूँ। सुनकर मेरे भीतर के साहित्यिक ने कनखियों से एकाध पृष्ठ उघाड़ दिये। ये इत्तेफ़ाक़ ही था कि जो पृष्ठ खुला उस...

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम...

बामियान के घाव

बहुत भयानक सपना था साक्षात् बुद्ध सामने थे …लहूलुहान। उनके पीछे एक भीड़ थी …पूरी भीड़। हताश से महावीर परास्त से गांधी और शर्मिंदा से पैग़म्बर किसी गहरे सदमे से सन्न राम किसी आशंका से त्रस्त कृष्ण और ख़ुद से नज़रें चुराते अम्बेडकर। सब थे …पर बदहवास। सबके...
error: Content is protected !!