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उलाहना

एक अजीब से रिश्ते में उलाहना देते हुए कहा तुमने- “आज बारिश हो रही है मैं भीग रही हूँ बरसात में तुम मत आना तुम्हें तो डर लगता है ना भीगने से।” मैंने कहा- “नहीं, भीगने से नहीं भीगने के बाद सूखने से।” ✍️ चिराग़...

बुलंदी

क्या हुआ हासिल बुलंदी पर पहुँच कर ऐ ख़ुदा जश्ने-दिल यां जश्ने अब्रां, जश्ने-रूह, जश्ने-सबा ✍️ चिराग़...

भारत रत्न का सवाल

भारत रत्न का सवाल है साहब। विवाद लाज़मी है। इतिहास साक्षी है हमने आज तक आसानी से किसी को महान नहीं माना। आसान और महान का कोई तारतम्य नहीं है ना। रामको जंगल भेजा, पत्नी से वियोग कराया, उनका घर उजाड़ दिया तब पता चला कि वो महान हैं। नानक, कबीर, महावीर, गांधी सबके साथ यही...

चंद्रोदय

चन्द्रमा ठहरो ज़रा सूरज अभी डूबा कहाँ है तुम दमक का दंभ भरना बाद में। जब तुम्हारे चाटुकारों का जुगनवी दल फुदकने के लिए अंधियार पा ले और लाखों बून्द जैसी तारिकाएँ जब घड़ी भर टिमटिमा लें तब दिखना नूर अपनी चांदनी का रात में सोए हुओं को और रोते श्वान, गीदड़, उल्लुओं को। रात...

अभी बुलेटिन जाना है

कोसी का बढ़ता पानी तीन दिन मीडिया में बहता रहा। कोसी भी उचक-उचक कर देखती रही कि ख़बर में क्या चल रहा है। एक ही ख़बर को बार-बार देख बेचारी बोर हो गयी। बिहार देखता रह गया और कोसी उतार पे आ गयी। किसी ने पूछा कि इतना सारा पानी (जो पूरे बिहार पर आफ़त बनकर टूटने वाला था) आख़िर...
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