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अश्लीलता – अश्लीलता

अश्लीलता समाज के लिए हानिकारक है और समाज अश्लीलता के लिए। पार्क में पेड़ के पीछे बैठी लड़की तभी अश्लील कही जा सकती है जब वो मेंरे साथ न बैठी हो। यदि उसको मेरे साथ बैठने में ऐतराज़ न हो तो मुझे नाक-भौं चढाने वालों को अनपढ़ और मैनर्सलैस कहने में क्या एतराज़ हो सकता है। पड़ोसी...

चाँद को नहीं पता

कहीं भी तो अंतर नहीं है यार! चांद को नहीं पता कि उसे देखकर कोई रोज़ा, ईद की ख़ुशी में तब्दील होगा या कोई उपवास, महाशिवरात्रि के उल्लास का रूप धरेगा। गाय को भी नहीं पता कि उसके थनों में जो धार उतरी है, वो सेवइयों की मिठास में घुलेगी या शिवलिंग पर ढलक कर पावन होवेगी।...

सनसनीबाज़ पत्रकार

छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और चादार तान के सो गया, इतनी देर में उसका अख़बार जनता के हवाले हो गया। इधर पत्रकार चैन से खर्राटे भर रहा था, उधर उसका अख़बार दुनिया की नाक में दम कर रहा था। दोपहर की पावन बेला में जब बिस्तर ने...

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स देख कर लग रहा है कि मोदी जी ब्रिक्स राष्ट्रों से यही पूछने गए थे की दिल्ली में भाजपा की सरकार कैसे बनाई जाए! ✍️ चिराग़...

शर्मिंदगी

“ओहो! कितना कूड़ा हो गया। आग लगे इस मौसम में। मार आंधी-तूफ़ान… सारे आंगन में कीचड़ हो गई। देखियो, उधर सारी अंबियाँ झड़ गईं। कैसी हरी डाल टूट गई नीम की! …इस रामजी को भी चैन ना है! कै तो पसीना चुआवै कै ऐसा तूफान मचावै।” अपने आपसे बतियाती हुई पानी...
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