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सबके हालात से मतलब

मेरे बारे में कौन क्या बोला मुझको इस बात से मतलब क्या है अपने जज़्बात से मतलब रखूं सबके हालात से मतलब क्या है ✍️ चिराग़...

चिंता

मैं नहीं मिटाना चाहता आधुनिकता के प्रभावों को न ही चिंतित हूँ मैं फैशन के बढ़ते चलन से। मैं तो सिर्फ़ संजो लेना चाहता हूँ अपना परिवार… …मुझे तो चिंता है ‘माँ’ पर लिखी कविताओं की! ✍️ चिराग़...

शब्द शिव हैं

शब्द शिव हैं। जब कभी बहती है भावना उद्विग्न हो मन के भीतर से तो उलझा लेते हैं उसे व्याकरण की जटाओं में। रोक देते हैं उसका सहज प्रवाह। सीमित कर देते हैं उसकी क्षमताएँ। कविता वेग है आवेग है उद्वेग है। वो तो शब्दों ने उलझा लिया वरना, बहा ले जाती सृष्टि के सारे कचरे को।...

इक नया रास्ता

ज़िन्दगी जब भी आज़माती है इक नया रास्ता दिखाती है न तो पिंजरे में चहचहाती है न ही अब पंख फड़फड़ाती है जब कभी माँ की याद आती है ये हवा लोरियाँ सुनाती है वो मरासिम को यूँ निभाती है मिरा हर काम भूल जाती है मेरे ख़्वाबों में यूँ वो आती है जैसे पाजेब छनछनाती है लफ़्ज़ मिल पाए तो...

कोशिश

मैं ‘मन’ लिखने की कोशिश करता हूँ ….सिर्फ़ कोशिश। कभी इसका मन कभी उसका मन कभी सबका मन …और कभी-कभी अपना भी मन। इतना ही समझ आता है मुझे कि ‘कोशिश’ और ‘कामयाबी’ उर्दू ज़ूबान के दो अलग-अलग अलफ़ाज़ हैं! ✍️ चिराग़...
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