+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

कोई यूँ ही नहीं चुभता

मैंने कौन-सी कविता कैसे लिखी, इस प्रश्न का उत्तर देना मेरे लिए असंभव-प्रायः है। भावनाओं के सागर में उठे ज्वार ने अन्तस् की धरती पर कैसा रेणुका-चित्र अंकित किया -यह तो सबको दिखाई देता है, लेकिन इस चित्र के सृजन की त्वरित प्रक्रिया में लहर कैसे उठी; कैसे धरती पर...

ख़ुशियों को ज़ंजीर

लिखे किसी ने गीत तो समझो, मन को गहरी पीर मिली सृजन हुआ उन्मुक्त तभी जब, ख़ुशियों को ज़ंजीर मिली किस्से बने, कहानी फैली, चित्र सजे, कविता जन्मी पर न मिली मजनू को लैला, ना रांझे को हीर मिली ✍️ चिराग़...

काव्य

जिन शिखरों को हो पिघलने से ऐतराज़ उन्हें कभी नदी-सा बहाव नहीं मिलता अनुभूति अनकही रहती हैं जब तक अक्षरों से उनका स्वभाव नहीं मिलता जोड़-तोड़ करने से कविता तो बनती है किन्तु ऐसी कविता में भाव नहीं मिलता काव्य तो है ऐसी पीड़ाओं की प्रतिध्वनि जहाँ टीस उठती है पर घाव नहीं...

सम्मान नहीं, अपनापन दो!

अभिनन्दन की मालाओं के फूलों की गंध नहीं भाती अनुशंसा और प्रशंसा से मुख पर मुस्कान नहीं आती कोई अभिलाषा शेष नहीं, यश-वैभव-कीर्ति प्रसारण की ये दुनियादारी की बातें मन को न घड़ी भर ललचाती या पूर्ण समर्पित होने दो, या मुझको पूर्ण समर्पण दो सम्मान नहीं, अपनापन दो! झूठे...

मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा

मेरे अन्तर्मन की पावन-सी कुटिया में मेरे गीतों की दिव्य प्रेरणा बसती है उसकी ऑंखों से बहती हैं ग़ज़लें-नज्में कविता होती है जब वो खुलकर हँसती है हर भाषा, संस्कृति, काल, धर्म और धरती की हर उपमा उस सौंदर्य हेतु बेमानी है सारे नष्वर लौकिक प्रतिमानों से ऊपर सुन्दरता की वो...
error: Content is protected !!