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अभी बुलेटिन जाना है

कोसी का बढ़ता पानी तीन दिन मीडिया में बहता रहा। कोसी भी उचक-उचक कर देखती रही कि ख़बर में क्या चल रहा है। एक ही ख़बर को बार-बार देख बेचारी बोर हो गयी। बिहार देखता रह गया और कोसी उतार पे आ गयी। किसी ने पूछा कि इतना सारा पानी (जो पूरे बिहार पर आफ़त बनकर टूटने वाला था) आख़िर...

फ्रेंडशिप

“भाई नी है… दिखा दे ना।” उसने मेरे ठीक पीछे वाले बेंच पर से फुसफुसा कर कहा। मैं थोड़ा सा सरक गया। “साले ढंग से दिखा वरना रहने दे।” “अबे तो मैं अपना न लिखूँ।” “अच्छा बस एक मिनिट।” “एक बार में देख ले, फिर नहीं...

अश्लीलता – अश्लीलता

अश्लीलता समाज के लिए हानिकारक है और समाज अश्लीलता के लिए। पार्क में पेड़ के पीछे बैठी लड़की तभी अश्लील कही जा सकती है जब वो मेंरे साथ न बैठी हो। यदि उसको मेरे साथ बैठने में ऐतराज़ न हो तो मुझे नाक-भौं चढाने वालों को अनपढ़ और मैनर्सलैस कहने में क्या एतराज़ हो सकता है। पड़ोसी...

पुनरागमन

आज मुद्दत बाद मेरा गीत मेरे द्वार आया बात में उसकी कहीं कोई परायापन नहीं था और मेरी याद से भी थी नदारद हर शिक़ायत ठीक पहले सी सहजता थी हमारे बीच लेकिन आँख की इक कोर पर थी सहज होने की क़वायद आज ख़ुद से मैं उसे ख़ुद को छिपाते देख पाया आज से पहले उसे छूना हुआ सौ बार लेकिन आज...

चाँद को नहीं पता

कहीं भी तो अंतर नहीं है यार! चांद को नहीं पता कि उसे देखकर कोई रोज़ा, ईद की ख़ुशी में तब्दील होगा या कोई उपवास, महाशिवरात्रि के उल्लास का रूप धरेगा। गाय को भी नहीं पता कि उसके थनों में जो धार उतरी है, वो सेवइयों की मिठास में घुलेगी या शिवलिंग पर ढलक कर पावन होवेगी।...
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