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तलाश

रेल की खिड़की में बैठी तुम अपनी हथेलियों में तलाशती रह गईं मुझको और प्रेम सरसों सा फूलता रहा धरती की हथेलियों में पड़ी लोहे की लम्बी लकीरों के दोनों ओर दूर तक …बहुत दूर तक। ✍️ चिराग़...

दीया आज़ादी का

दीपक जलते दीवाली के, दीपक जलते हैं यादों के रौशनी बिखरती कातिक में, उत्सव मनते हैं भादो के घर भर में ज्योति पसरती है, शादी-ब्याहों में टेलों में जमकर आतिशबाज़ी होती, गर विजय मिली हो खेलों में लेकिन हम मौन बिताते हैं, उत्सव अपनी आज़ादी का आँगन में नहीं लगाते हैं इक दिव्य...

भारत रत्न का सवाल

भारत रत्न का सवाल है साहब। विवाद लाज़मी है। इतिहास साक्षी है हमने आज तक आसानी से किसी को महान नहीं माना। आसान और महान का कोई तारतम्य नहीं है ना। रामको जंगल भेजा, पत्नी से वियोग कराया, उनका घर उजाड़ दिया तब पता चला कि वो महान हैं। नानक, कबीर, महावीर, गांधी सबके साथ यही...

चंद्रोदय

चन्द्रमा ठहरो ज़रा सूरज अभी डूबा कहाँ है तुम दमक का दंभ भरना बाद में। जब तुम्हारे चाटुकारों का जुगनवी दल फुदकने के लिए अंधियार पा ले और लाखों बून्द जैसी तारिकाएँ जब घड़ी भर टिमटिमा लें तब दिखना नूर अपनी चांदनी का रात में सोए हुओं को और रोते श्वान, गीदड़, उल्लुओं को। रात...

अद्भुत थे प्राण।

अपने हर चरित्र में जो मनोवैज्ञानिक इंजीनियरिंग की वो कमाल थी। चाचा चौधरी का दिमाग़ बड़ा बनाया और होंठ मूछ में छुपा दिए। साबू का शरीर बड़ा बनाया। पिंकी, बिल्लू, चाची इन सबके आकार में एक प्रकार था। साबू जैसे चरित्र की कल्पना कार्टून जगत् में एलियन का प्रादुर्भाव था। संभवतः...
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