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मन की कविता

कविता मेरे अस्तित्व का आधार है। यदि मुझसे मेरी कविताओं को श्रेणीबद्ध करने को कहा जाए तो मैं अपनी तमाम रचनाओं को दो वर्गों में रखूंगा- एक ‘मंच की कविता’ और दूसरी ‘मन की कविता’। ‘मंच की कविता’ रोज़ रात को कवि-सम्मेलनों में तालियाँ और वाह-वाही लूटती फिरती है। लेकिन ‘मन की...

सनसनीबाज़ पत्रकार

छाप-छूप कर अख़बार एक सनसनीबाज़ पत्रकार रात तीन बजे घर आया तकिये में मुँह छुपाया और चादार तान के सो गया, इतनी देर में उसका अख़बार जनता के हवाले हो गया। इधर पत्रकार चैन से खर्राटे भर रहा था, उधर उसका अख़बार दुनिया की नाक में दम कर रहा था। दोपहर की पावन बेला में जब बिस्तर ने...

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स

न्यूज़ चैनल्स की रिपोर्ट्स देख कर लग रहा है कि मोदी जी ब्रिक्स राष्ट्रों से यही पूछने गए थे की दिल्ली में भाजपा की सरकार कैसे बनाई जाए! ✍️ चिराग़...

शर्मिंदगी

“ओहो! कितना कूड़ा हो गया। आग लगे इस मौसम में। मार आंधी-तूफ़ान… सारे आंगन में कीचड़ हो गई। देखियो, उधर सारी अंबियाँ झड़ गईं। कैसी हरी डाल टूट गई नीम की! …इस रामजी को भी चैन ना है! कै तो पसीना चुआवै कै ऐसा तूफान मचावै।” अपने आपसे बतियाती हुई पानी...

ब्लॉगर होगा पहला कवि

युग बीत गये हैं अब प्रकृति, बरखा या दर्द सहायक सामग्री नहीं है अब कविता के लिये! …अब नहीं जन्मती कविता वियोग या संयोग से! आजकल फ़ेसबुकिये हो गये हैं वाल्मीकि और तुलसीदास! “ब्लॉगर होगा पहला कवि पोस्ट से उपजा होगा गान!” ✍️ चिराग़...
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