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प्यार को चंद मजबूरियाँ खा गईं

स्वप्न तो खो गए बुद्धि के द्वार पर प्यार को चंद मजबूरियाँ खा गईं बच गई साथ की झुंझलाहट जहाँ उस जगह प्रीत को दूरियाँ खा गईं पारलौकिक सुखों की बड़ी प्यास को कंदरा का महानंद जकड़े रहा सुन सको तो सुनो काव्य एकांत का बस जिसे मौन का छंद पकड़े रहा ज़िन्दगी की समूची हिरन चैकड़ी...

मनोरंजक चुनावी रैलियाँ

सरकार चाहती है कि दिल्ली की जनता सड़क पर पार्किंग न करे। जनता भी चाहती है कि उसे अपनी गाड़ी अनाधिकृत स्थान पर खड़ी न करनी पड़े। लेकिन सरकार गाड़ी के लिए पार्किंग का स्थान मुहैया नहीं करवा पाती। वह जनता से कहती है कि अपने घर के भीतर गाड़ी खड़ी करो। जनता हाथ जोड़ कर कहती है कि...

सरकारी दफ्तर में काम

किसी सरकारी दफ़्तर में काम अटक जाये तो हर भारतीय के पास दो विकल्प होते हैं। पहला, वह ईमानदारी की लड़ाई लड़े और अपने सब काम-धंधे छोड़कर अधिकारियों, थानों, अदालतों, मीडिया और विजिलेंस के चक्कर लगाने शुरू कर दे। इस प्रक्रिया में काफ़ी परेशानी और ज़िल्लत उठाने के बाद अंततः यह...

इस राह चलकर देखते हैं

चलो, इस राह चलकर देखते हैं कहाँ बदले मुकद्दर, देखते हैं कहीं मुस्कान तो लब पर नहीं है मेरे आँसू छलककर देखते हैं हमें तो दिख रहा है कंठ नीला यहाँ सब सिर्फ शंकर देखते हैं हमारे हौसलों की थाह मत लो कहाँ तक है समंदर, देखते हैं अगर हँसता हुआ मिल जाऊँ उनको तो जिगरी यार जलकर...

हम उदासीन हैं

जब नोटबन्दी के पक्ष में भाजपा, जनता के बयान प्रस्तुत करने की कोशिश करती है, तब कांग्रेस, मनमोहन सिंह जी द्वारा जुटाए गए आँकड़े दिखाने लगती है और जब भाजपा ने एक विदेशी संस्था के आँकड़े दिखाकर देश की प्रगति की गवाही दी, तो कांग्रेस आम आदमी की व्यवहारिक समस्याओं का चित्र...
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