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आशाओं पर आघात

पतझर का आना निश्चित था पत्ते झर जाना निश्चित था हरियाली की आशाओं पर, बादल ने आघात करा है आँगन में जो ठूठ खड़ा है, वो सावन के हाथ मरा है दुःशासन ने चीर हरा तो ठीक समय आ पहुँचे माधव भीष्म काल बनकर बरसे तो तोड़ प्रतिज्ञा पहुँचे माधव एकाकी होकर जूझा अभिमन्यु अकेला...

कृष्ण हो पाना कठिन है

रीतियों को तोड़ने का बल जुटा पाना कठिन है बल जुटा लो तो सभी से बात मनवाना कठिन है तर्जनी पर न्याय ठहराना कठिन है रे। कृष्ण हो पाना कठिन है रे। हर किसी की पीर का संज्ञान होना खेल है क्या शब्दहीना आस का अनुमान होना खेल है क्या प्रश्न, जिज्ञासा, शिक़ायत ही मिलें सबके नयन...

दिल्ली की व्यवस्था

वैसे दिल्ली दिलवाले मरीजों की राजधानी मानी जाती थी, लेकिन आजकल प्रदूषण ने इसे फेफड़ेवाले मरीजों की फैक्ट्री बना दिया है। स्मार्टफोन के कैमरे और यूट्यूब से कमाई की ख़बरों ने जिस कौम का सबसे ज़्यादा नुक़सान किया है वह है आशिक़। सफदरजंग मक़बरा, पुराना किला, लोदी गार्डन,...

हौसला सलामत है

जब तलक़ ज़मीं से ये राब्ता सलामत है फिर बहार लाने का हौसला सलामत है घर उजड़ गया उसका, उम्र कट गई सारी जिसके हक़ में मुंसिफ़ का फ़ैसला सलामत है इल्म भी नहीं होगा उड़ चुके परिंदों को एक ठूंठ पर उनका घोंसला सलामत है काट ली सज़ा जिसकी, हो चुका बरी जिससे आज भी मेरे दिल में वो ख़ता...

मरासिम

यार दहशत से समर्पन नहीं जीता जाता रूप मिल सकता है, यौवन नहीं जीता जाता क्या मरासिम की रवायत में कोई ख़ामी है तन लिवा लाते हैं पर मन नहीं जीता जाता एक झोंके की छुअन से ही बरस जाता है आंधियो! शोर से सावन नहीं जीता जाता सामने वाले के एहसास पे हारो ख़ुद को प्यार का खेल...
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