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दिल्ली भारत की राजधानी है

दिल्ली भारत की राजधानी है। देश के सभी प्रकार के कार्यों को करने के लिए बड़े-बड़े सरकारी दफ्तर इसी शहर में बनाए गए हैं। इस प्रयास में पूरा शहर एक दफ़्तर हो गया है और हर नागरिक एक फाइल। घर से दफ़्तर और दफ़्तर से घर के बीच घूमते-घूमते हर नागरिक के व्यक्तित्व पर इतनी खरोंचें...

कर्ण का परिताप

तुम प्रपंचों में समय अपना खपाना मैं समर के हर नियम को मान दूँगा तुम बदलकर वेश मुझसे मांग लेना मैं कवच-कुण्डल ख़ुशी से दान दूँगा हाथ की सारी लकीरें हैं विरोधी अब भला कुछ झोलियों का रीतना क्या न्याय से या सत्य से सम्भव नहीं जो झूठ कहकर उस समर को जीतना क्या तुम निहत्थे...

सत्य के निशान

जब घिरे सवाल तो निदान खोजते रहे हर कथा में सत्य के निशान खोजते रहे लोग जो परोपकार की मिसाल हो गए दूसरों का दर्द ओढ़कर निहाल हो गए उन प्रजातियों का ख़ानदान खोजते रहे हर कथा में सत्य के निशान खोजते रहे प्रीति की प्रतीतियों में लीन राधिका हुई प्रेम की हवाओं में विलीन...

समय का बारदाना

जब समय फंदा कसेगा भूमि में पहिया धँसेगा शाप सब पिछले डसेंगे पार्थ नैतिकता तजेंगे उस घड़ी तक जूझने का भ्रम निभाना है सब समय का बारदाना है नीतियों का ढोंग करतीं, सब सभाएँ मौन होंगी न्याय की बातें बनातीं मन्त्रणाएँ मौन होंगी जब प्रणय को भूलकर राघव निरे राजा बनेंगे तब सिया...

स्त्री तुम कल आना

स्त्री की सामाजिक स्थिति पर एक प्रभावी कटाक्ष है, अमर कौशिक निर्देशित फिल्म “स्त्री”। नारी मुक्ति के तमाम चलताऊ नारों और मोर्चों से हटकर पुरुषवादी समाज की सोच का शानदार चलचित्र है “स्त्री”। हालांकि फिल्म का प्रचार एक हॉरर-कॉमेडी की तरह किया जा...
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