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पुरुषोचित

जनक ने कहा- “प्रत्यंचा चढ़ाओ!” तुमने धनुष ही तोड़ दिया। जनता ने कहा- “धोबी की पत्नी को न्याय दिलाओ!” तुमने अपनी पत्नी को ही छोड़ दिया। धनुष तोड़ कर सीता को तो वर लाए फिर कभी सुधि नहीं ली उस टूटे वरदान की, सीता को त्याग कर उदाहरण तो बन गए लेकिन...

हवा में ज़हर घुलता जा रहा है।

हवा में ज़हर घुलता जा रहा है। वो सारी गंदगी जो आग के ज़रिए हवाओं में कहीं ग़ुम हो गई थी; वही अब साँस के ज़रिए हमारे फेफड़ों में जम रही है। हमारी साँस की सरगम सुनाती धौंकनी से अचानक आह की आवाज़ आने लग गई है। कोई तो है जो अपने साथ बीती ज़्यादती का हमारी नस्ल से दिन-रात बदला...

सीख

मैंने सीमेंट से सीखा है कि जोड़ने के लिए नर्म होना ज़रूरी है और जोड़े रखने के लिए सख़्त…! ✍️ चिराग़...

दुःख से यारी

सुख मिलने से भी कतराया दुःख देहरी तक चलकर आया सुख के नखरे कौन उठाता मैंने दुःख से यारी कर ली सुख को पाने की कोशिश में, हर दिन ख़ुद को सेज किया है दुःख, जिसने किरदार निखारा, उससे ही परहेज किया है अब मैंने अपने दुखड़े संग हँसने की तैयारी कर ली सुख के नखरे कौन उठाता मैंने...

ख़रीददार

वेदियाँ बाज़ार में आ तो गई हैं किंतु फिर भी सिर्फ़ दौलत से इन्हें पाना अभी मुम्किन नहीं है हर गुज़रता शख़्स इनके दाम पूछेगा यक़ीनन हर किसी के हाथ बिक जाना अभी मुम्किन नहीं है हाथ में अमृत लिए धन्वंतरि आ ही गए हैं पर अमरता के लिए संग्राम होना है ज़रूरी हाँ, कई राजा उपस्थित...
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