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धरना पुरुष

सर जी से कह दो देश में धरने का मौसम धरने का मौसम आ गया जंतर-मंतर पे शोरगुल करने का मौसम करने का मौसम आ गया सड़कों पे बहारें आई है फिर बिल की बदली छाई है धरनों के चरणों में तुमने दिल्ली की सियासत पाई है पीएम की कुर्सी बाँह में भरने का मौसम भरने का मौसम आ गया हे रायते के...

किसान आंदोलन, सरकार और कोविड

आज भारतीय शासन-तंत्र के प्रति श्रद्धा उमड़ रही है। इतने बड़े देश को सही से चलाने के लिये हर समस्या का समाधान खोजने चले तो सिस्टम के पसीने छूट जायेंगे, इसीलिये इसका श्रेष्ठ उपचार यह है कि जो आपके पास समस्या लेकर आये उसे किसी और समस्या में उलझा दो। इससे उसकी समस्या का...

मेरो आज सकूटर बिक जायगौ

मेरो काट दयो चालान, हाय राम मेरो आज सकूटर बिक जायगौ मेरी सूख रही है जान, भगवान मेरो आज सकूटर बिक जायगौ इत कू सिगनल झपकी देवै, उतै पुलिसिया घूरै जेब सहम कर हाथ पकड़ ले, अण्टी झूला झूलै मेरो भटक गयो है ध्यान, भगवान मेरो आज सकूटर बिक जायगौ जहाँ नैक गीयर बदलें वां बैरीगेट...

प्रतिक्रियाहीन लोकतंत्र

देश बहुत विकट परिस्थितियों से गुज़र रहा है। राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं ने हमें मूलभूत आवश्यकताओं को अनदेखा करना सिखा दिया है। न्याय व्यवस्था स्वयं कठघरे में खड़ी है। जनता, अपराधियों से अधिक पुलिस से आक्रांत है। मीडिया, औद्योगिक घरानों की उंगलियों पर नाच रहा है और आद्योगिक...

दल बदलू का कार्यकर्ता

कल तक जो थे दोस्त, कहा अब उनको दुश्मन मान हम पुतले हैं या इंसान कल तक जिनको गाली दी थी जुमला छाप जुगाली की थी अब कहते हो गाली छोड़ करें उनका गुणगान हम पुतले हैं या इंसान कल तक जिनके कपड़े फाड़े हमने जिनके टैंट उखाड़े अब तुम ख़ुद ही बैठ गये हो उनका तम्बू तान हम पुतले हैं या...
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