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ऐसी-तैसी हो गयी

तुमने कैसी फसल लगाई, सत्ता कैसी हो गयी पूरे लोकतंत्र की भाई, ऐसी तैसी हो गयी बीजेपी ने जीएसटी का खेल खिलाया ऐसा बाज़ारों की लुटिया डूबी, बगलें झाँके पैसा ये जीएसटी तुमसे पाई, ऐसी तैसी हो गयी जिस ईवीएम के घपले को कोस रहे कांग्रेसी अब उसके नुक़सान उठाओ, इसमें लज्जा कैसी...

एक टुकड़ा हिंदुस्तान

शहर में बैठकर गाँवों का अंदाज़ा नहीं होगा। वहाँ ऐसे भी आंगन हैं कि जिनके घर नहीं बाक़ी। जहाँ खंडहर से भी बदतर घरों में जी रहे हैं लोग सुना है, कुछ जगह तो खंडहरों के भी महज खंडहर बचे हैं। समझ पाना दिनोंदिन और मुश्किल हो रहा है कि उन मिट्टी के दड़बों में दुबककर जो कुछेक...

यह देश की पालकी है?

सभी राजनैतिक दल एक साथ मिलकर देश को एक निश्चित दिशा में ले जा रहे हैं। मीडिया वाच डॉग बनकर इस कारवां के पीछे दौड़ रहा है, ताकि देश द्रुतगति से उस दिशा में बढ़ता रहे। जनता अपने भविष्य को दाँव पर लगाकर इस कारवां में जीत-हार तलाश रही है। यह तय करने की फ़ुरसत किसी के पास...

किसान आंदोलन

सड़कों पे आया रे किसान, देखे संसद को पलकों पे आँसू के निशान, देखे संसद को अपनी सियासत तुम ही संभालो पैरों में चुभा बस काँटा निकालो रूठ गए हैं जो, उनको मना लो इनसे न बनो अनजान, देखे संसद को अपनों से अपनों की कैसी लड़ाई जनता है छोटी, तुम हो बड़ भाई उनकी अड़ाई, तुम्हारी कड़ाई...

धरना दिया किसानों ने

दिल्ली के द्वारे आकर जब धरना दिया किसानों ने करवट तो बदली ही होगी, सरजी के अरमानों ने भीड़ जुटी तो आँखों में फुलझड़ियां छूट रही होंगी हाथों में खुजली, मन में झुरझुरियाँ फूट रही होंगी अपनापन-सा दिखता होगा लाठी छाप निशानों में करवट तो बदली ही होगी, सरजी के अरमानों ने दिल...
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