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उदित राज के विवादित बयान

कैसे देते हो विवादित बयान बताओ ये कहाँ से सीखे ऐसी बातें ही क्यों करते श्रीमान बताओ ये कहाँ से सीखे बीच बहस में क्यों चैनल को छोड़ चले आते हो अपनी-अपनी कहते, औरों की नहीं सुन पाते हो झट से हो जाते हो कैसे अंतर्धान बताओ ये कहाँ से सीखे कभी कुम्भ के मेले पर ही प्रश्न उठा...

उदित राज को समर्पित

जब तक टिकट नहीं कट जाती तब तक सब कुछ चलता है सब कुछ है चलता है टिकट का कटना खलता है जिस पुलवामा की घटना को साज़िश आप बताए उस घटना के घटने पर क्यों दल को छोड़ न पाए जिसकी खाट खड़ी हो जाए वो ही आँखें मलता है आंखें मलता है, टिकट का कटना खलता है राष्ट्रपति को गूंगा-बहरा कहते...

राजनीति में कार्यकर्ता की सीमाएँ

भारतीय राजनीति, जनता को, मिलकर रहने की प्रेरणा देती है। धर्म, विचार, आदर्श, सिद्धांत और विचारधारा जैसे खिलौनों में उलझकर आपस में द्वेष उत्पन्न करनेवाले लोगों को राजनीति से सीखना चाहिए कि इन सब रास्तों का अस्तित्व वहीं तक है, जहाँ तक गंतव्य दिखाई न देता हो। एक बार...

बात-बात पर बदलें मापदण्ड

हैदराबाद में पुलिस ने बलात्कार के आरोपियों का एनकाउंटर किया। इस घटना पर एक तबक़ा पुलिस को साधुवाद देते हुए यह तर्क दे रहा था कि न्याय व्यवस्था की विफलता के कारण पुलिस का यह क़दम तर्कसंगत है। यह शाबासी इस बात की भी गवाही दे रही थी कि यह एनकाउंटर एक वेल प्लैन्ड इंसिडेंट...

नकारखाने में तूती की आवाज़

हम घटना और व्यक्ति में अन्तर करना क्यों नहीं सीख पाते। हमारी मान्यता ऐसी क्यों है कि जिसकी एक ग़लती सिद्ध हो गयी है, वह अन्य सब जगह भी ग़लत ही होगा। एक ही व्यक्ति एक जगह सही और दूसरी जगह ग़लत क्यों नहीं हो सकता। हमारा समाज लम्बे समय से इस रोग से ग्रस्त है कि जिसे हमने...
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