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काँटों पर कटती हैं रातें

झलक नहीं मिलती इनके पैरों के छालों की काँटों पर कटती हैं रातें हँसने वालों की सब जैसी ही देह, जरा का डर इनका भी है आयु बढ़े तो तन निश्चित जर्जर इनका भी है भूख-तृषा की व्याधि इन्हें भी घेरे रहती है ख़ुद से हैं बेहोश, पीर ही इनको सहती है स्वार्थ गलाकर कुंजी गढ़ लीं ग़म के...

साहित्यिक गोष्ठियों के वक्ता

आज एक साहित्यिक कार्यक्रम में अनेक वक्ताओं को सुनने का अवसर मिला तो पता चला कि आजकल मार्केट में अनेक प्रकार के वक्ता चल रहे हैं। कुछ परंपरागत वक्ता जो पुराने ढर्रे पर विषय का बाक़ायदा अध्ययन करके मंच पर आते हैं, वे आजकल मंच पर आ नहीं पाते हैं। इसके विपरीत वे लोग मंच की...

विज्ञापन से पता चला

विज्ञापन से पता चला कि खली की अपनी बॉडी से उनका अपना घर टूट गया। उनको अपने अवार्ड वापस कर देने चाहिए थे। लेकिन उन्होंने अवॉर्ड वापस करने की बजाय अपनी मौसी से सलाह ली। अब वो अम्बुजा सीमेंट से घर बणवा के आराम से रह रहे हैं। मुझे समझ नहीं आता कि इन सब पुरस्कार विजेताओं...

इसे कहते हैं बाज़ी

सियासत के एक खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …सरकार का विरोध करने के लिए। फिर सियासत के दूसरे खेमे ने कुछ कलाकारों को बटोरा …कलाकारों का विरोध करने के लिए। अब कुछ दिन हो-हल्ला होगा। एक खेमे के कलाकार दूसरे खेमे के कलाकारों को गालियाँ देंगे। खूब शोर होगा।...

इच्छा

मुझे हुनर की बड़ी नेमतें अता करना मेरे ख़ुदा तू मुझे शोहरतें अता करना मैं रोज़ रात इक हुजूम से मुख़ातिब हूँ ख़ुद से मिल पाऊं इतनी मोहलतें अता करना ✍️ चिराग़...
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