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आँसू की आवाज़

सारे ही सुख थे बगिया में, फिर क्यों तुमने पीर चुनी है क्या तुमने भी तन्हाई में, आँसू की आवाज़ सुनी है क्या तुमने भी महसूसा है, एकाकी हो जाना जग में क्या तुमने जी भर भोगा है, सब अपने खो जाना जग में क्या तुमने भी भावुकता को लुट कर मरते देख लिया है क्या तुमने भी अपनेपन का...

तुलसी बाबा के वंशज

कविता को आसान बनाकर जन-जन तक पहुँचाने वाले तुलसी बाबा के वंशज हैं, हम मंचों पर जाने वाले मेले, गाँव, गली, चौबारे, संसद, देश, विदेश विचरते चिंता की त्यौरी पिघलाकर, ओंठों पर मुस्कानें धरते एक ठहाके के जादू से पीड़ा को ग़ायब कर देते हर अंधियारे की झोली में आशा का सूरज धर...

उत्सव का संयोग

कवि के आँगन में पीड़ा के उत्सव का संयोग हुआ है निश्चित है अब इस ड्योढ़ी पर कोई अनुपम गीत सजेगा आँसू ने पलकें धो दी हैं, मुस्कानों के आमंत्रण पर सपने आँगन पूर रहे हैं, आशा सज आई तोरण पर वीणा के सोए तारों को छूकर निकली है बेचैनी कुछ पल ठहरो इन तारों पर पावनतम संगीत सजेगा...

आलोचना-आमंत्रण

सिर्फ़ प्रशंसा से निश्चित ही धार बिगड़ती है लेखन की तुम मेरे गीतों की अब से निर्मम-निठुर समीक्षा करना बगिया के जो बिरवे माली की कैंची से दूर रहे हैं वो बगिया की उर्वर भू से हटने को मजबूर रहे हैं छँटने-कटने की पीड़ा से ही मिलता है रूप सुदर्शन तुम बस घावों पर नव पल्लव उगने...

एक गीत मस्ती का

आकलन नहीं करना आप मेरी हस्ती का कुछ अलग कलेवर है मेरे दिल की बस्ती का एक ही ज़मीं पर मैं एक संग उगाता हूँ एक गीत करुणा का, एक गीत मस्ती का अश्क़ की कहानी भी शब्द में पिरोता हूँ दर्द देखता हूँ तो ज़ार-ज़ार रोता हूँ ख़ूब खिलखिलाता हूँ ग़लतियों पे मैं अपनी व्यंग्य-बाण ख़ुद को...
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