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युग बीत गये हैं अब
प्रकृति, बरखा
या दर्द
सहायक सामग्री
नहीं है अब
कविता के लिये!

…अब नहीं जन्मती कविता
वियोग या संयोग से!

आजकल
फ़ेसबुकिये हो गये हैं
वाल्मीकि और तुलसीदास!

“ब्लॉगर होगा पहला कवि
पोस्ट से उपजा होगा गान!”

✍️ चिराग़ जैन

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