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केदारनाथ धाम का उलाहना

देखकर तुमको पुलककर खोल दूंगा द्वार इस भ्रम में नहीं रहना! याद रखना, सर्द बर्फीली हवा से भागकर तुम मधुर मनुहार के हर इक नियम को त्यागकर छोड़ जाते हो कड़कती ठण्ड से बन स्वार्थी बर्फ़ के वीरान जंगल में अकेला, बेसहारा ये सभी कुछ भूलकर तुमसे मिलूंगा; मैं निरा ईश्वर नहीं हूँ।...

शिक्षा की रौशनी

पहाड़ की घुमावदार पगडंडी पर स्कूल जा रही हैं लड़कियाँ। …मतलब बचपन में हमें ग़लत पढ़ाया गया था कि रौशनी सीधी रेखा में ‘ही’ यात्रा करती है। ✍️ चिराग़...

प्रतिशोध

ओ धोबी सच बताना क्या तुम्हारे पुरखे भी गए थे राम के पीछे-पीछे विह्वल होकर वनवास की हठ लिए या फिर तुम ही चले आए थे राम के पीछे-पीछे लंका से प्रतिशोध लेने © चिराग़...

प्रेम-कथा के अंत में

प्रेम-कथा के अंत में दो में से एक ही चीज़ प्रेमी के पास जीवन भर को रह जाती है- प्रेमिका या प्रेम। ✍️ चिराग़...

हर त्योहार हर रोज़

आज एक टीवी चैनल पर समाचार प्रस्तोता टाइम पास करने के लिए बोल रहा था कि ये दुर्भाग्य की बात है कि हम लोग साल में कुछ ही दिन देशभक्ति के गीत गाते हैं। हम साल में एक ही दिन शहीदों को याद करते हैं। मुझे उसकी बात सुनकर लगा कि सचमुच करते तो हम ग़लत ही हैं। यह परंपरा बंद होनी...
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