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नफ़रतें

आइये, मिलकर बढ़ायें नफ़रतें चप्पे-चप्पे पर उगायें नफ़रतें धर्म अपना यूँ निभायें नफ़रतें एक दिन हमको ही खायें नफ़रतें प्यार, माफ़ी,अम्न और इंसानियत इन सभी को काट आयें नफ़रतें गर मुहब्बत की कोई बातें करे तो उसे ज़िन्दा जलायें नफ़रतें जिसने ये दुनिया बनाई प्यार से आओ, उसको भी...

साहिब!

ये तुमने कौन से अंदाज़ से छुआ साहिब हुई है बेअसर हर शख़्स की दुआ साहिब सियार करते थे शब भर हुआ-हुआ साहिब उन्हें भगाने चला आया तेंदुआ साहिब हमारे चैन की हुंडी का हो गया सौदा ज़रा बताओ, मुनाफ़ा किसे हुआ साहिब ज़ुबां तो काट दी, रोटी न छीनना हमसे सुना है पेट भी देता है बद्दुआ...

राजनीति की फ़िल्म इंडस्ट्री

राजनीति की स्क्रिप्टिंग और प्रशासन का अभिनय देखकर लगता है कि उत्तर प्रदेश में फ़िल्म इंडस्ट्री बनाने का विचार निराधार नहीं था। ✍️ चिराग़...

बलात्कार को ओनर किलिंग बनाने की शुरुआत

सियासत किस तरह करती रही बर्ताव, मत भूलो कुरेदेंगे तुम्हारे ही बदन के घाव, मत भूलो तुम्हारी चीख़ से कुर्सी न हिल जाये मसीहा की अरे ओ हाथरस वालो, अभी उन्नाव मत भूलो ✍️ चिराग़...

क्या करोगे

कहाँ तक झूठ का पर्दा करोगे कभी तो झील में चेहरा करोगे बिछाकर जाल दाना डालता है तो क्या सय्याद का सजदा करोगे? कराहों को दबाया जा रहा है कहीं चीखें उठीं तो क्या करोगे सुना है भूख शर्मिंदा हुई है हवस को कब तलक पूरा करोगे अगर ज़िल्लत की आदत पड़ गई तो फिर ऐसी ज़िन्दगी का क्या...
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