+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

क्या-क्या बदलता है

कभी मुद्दा, कभी चेहरा, कभी पाला बदलता है सियासतदां सियासत के लिए क्या-क्या बदलता है न पूछो वक़्त अपने साथ में क्या-क्या बदलता है सुबह से शाम होने तक मेरा साया बदलता है यहाँ हर आदमी उस गाम पर चेहरा बदलता है जहाँ जाकर मेरे किरदार का ओहदा बदलता है हुनर का वो भी इक मैयार...

उससे पहले ख़ुद को गिनना

बस यूं कहिए ध्यान नहीं था वरना, मैं नादान नहीं था उससे पहले ख़ुद को गिनना ये इतना आसान नहीं था ✍️ चिराग़...

भारत में नागर विमानन के सौ वर्ष

प्राप्य से इतर अप्राप्य की ओर आकर्षित होना मनुष्य का सहज स्वभाव है। इसी तथ्य के परिप्रेक्ष्य से यह स्पष्ट होता है कि धरती पर चलने के अपने नैसर्गिक गुण में किसी प्रकार का विकास करने से अधिक उर्जा मानव ने तैरना और उड़ना सीखने में व्यय की। महत्वाकांक्षाओं के झरोखों से जब...

समाधान

बहुत समझदार हो तुम जब कभी उदासी का आँचल ओढ़कर जवान होने लगता है मेरा कोई दर्द तो चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के ‘कंधा देकर’ पहुँचा आते हो उसे वहाँ …जहाँ से लौट नहीं पाया कोई आज तक। ✍️ चिराग़...

विपक्षी

ग़ायब से हो गए हैं, अख़बार से विपक्षी चुन-चुन के आ गए हैं, बेकार से विपक्षी बचने लगे हैं क्यूंकर तकरार से विपक्षी शायद मिले हुए हैं, सरकार से विपक्षी ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!