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बरसात की एक सुबह

लाजवाब है आज की सुबह रात भर धोया गया है सारा शहर हर पेड़ को नहलाया गया है रात भर उत्सव का नज़ारा कर रहा हूँ अपनी बालकॅनी से। दारू पी है शायद नीम और पीपल ने। अभी तक झूम रहे हैं दोनों याड़ी। सहजने की फलियाँ बिछ गई हैं …मुजरा करने के बाद। मिट्टी की ख़ुश्बू वाला फ्रेशनर...

मुल्क़ को स्वर्ग बनाने का ख़्वाब

अब इस तरह से अमन ये वतन न पाएगा सियासती कभी जनता का मन न पाएगा मुल्क़ को स्वर्ग बनाने का ख़्वाब देख तो लें मगर सियासती लोगों से बन न पाएगा ✍️ चिराग़...

चाचा-भतीजा और कवि-सम्मेलन

चाचाजी को भतीजों का दस्ता चहिये था नया अपना अरुण जैमिनी भी इंटरव्यू देने गया इंटरव्यू में पूछा गया सिर्फ एक सवाल अरुण ने बना दिया सवाल का बबाल सवाल था- “अरुण, यदि तुम लालकिला कवि सम्मेलन में बुलाए जाओगे, तो कौन सी कविता सुनाओगे?” अरुण बोला –...

बहार आई है

पूरे गुलशन की फ़िज़ाओं में ख़ुशी छाई है हर दिशा नूर न जाने कहां से लाई है शाख से फूल सजे हैं, कि फूल से शाखें कुल मिलाकर ये हुआ है कि बहार आई है ✍️ चिराग़...
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