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वो शालीन पल

हाँ, गुज़ारे थे कभी दो-तीन पल कुछ हसीं, कुछ शोख़, कुछ रंगीन पल हर तरह की वासना से हीन पल अब कहाँ मिलते हैं वो शालीन पल भोग, लिप्सा, मोह के संगीन पल कब किसे दे पाए हैं तस्कीन पल आपका आना, ठहरना, लौटना इक मुक़म्मल हादसा थे तीन पल साथ हो तुम तो मुझे लगता है ज्यों हो गए हैं...

सरस्वती वंदना

जगती को वरदान ये, दीजे माँ वागीश हर इक दीपक को मिले, सूरज से आशीष ✍️ चिराग़ जैन

प्रार्थना

सब चोरी का माल है, वाणी-भजन-पुराण प्रेम-पत्र लिखवा रहे, ग़ैरों से नादान रटी-रटाई प्रार्थना, सुना-सुनाया ज्ञान बोर किया भगवान को, कैसे हो उत्थान ✍️ चिराग़...

जीत की चाहत

चंद सस्ती ख्वाहिशों पर सब लुटाकर मर गईं नेकियाँ ख़ुदगर्ज़ियों के पास आकर मर गईं जिनके दम पर ज़िन्दगी जीते रहे हम उम्र भर अंत में वो ख्वाहिशें भी डबडबाकर मर गईं बदनसीबी, साज़िशें, दुश्वारियाँ, मातो-शिक़स्त जीत की चाहत के आगे कसमसाकर मर गईं मीरो-ग़ालिब रो रहे थे रात उनकी लाश...

नए नग़मे सजा लेना

मैं जहाँ भी रहूँ मुझको ख़ुशी मिल जाएगी बस मेरे गीत गुनगुना के मुस्कुरा देना जब मेरे गीत इस जहान के काबिल न रहें नए नग़मे सजा लेना मुझे भुला देना ✍️ चिराग़...
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