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इश्क़ की महफ़िल

दुनिया को भूल जाओ ये इश्क़ की महफ़िल है आओ हुज़ूर आओ ये इश्क़ की महफ़िल है जो होश में हैं उनको दुनिया के ग़म मुबारक़ हुमको तो तुम मुबारक़ तुमको तो हम मुबारक़ हाथों में जाम उठाओ ये इश्क़ की महफ़िल है दिल की सुनो घड़ी भर लोगों की फ़िक्र छोड़ो अपनों की बात सुन लो औरों का ज़िक्र छोड़ो...

चुटकुला

मंच की आलोचना का बोझ भी ढोता रहा और उसका मंच पर उपयोग भी होता रहा हास्य कविता की शक़ल में चुटकुला जब भी ढला तालियाँ तो पिट गईं पर चुटकुला रोता रहा ✍️ चिराग़...

अच्छी कविता

अपनों से मिलने वाला दर्द जन्म देता है अच्छी कविता को। शायद इसी कारण मैं नहीं लिखना चाहता कोई अच्छी कविता तुम्हें ले कर। ✍️ चिराग़...

पानी ही पानी

दिल्ली में हर साल आती है बाढ़ हर साल सिर के ऊपर से गुज़रने लगता है पानी। और हर साल ढिठाई के साथ बयानबाज़ी करते हैं सरकारी गलियारे। …कमाल है जहाँ देखो पानी ही पानी है सिवाय सरकारी आँखों के। ✍️ चिराग़...

आन्दोलन

हम तो हर इक ज़ुल्म की हद से गुज़र भी जाएंगे शेर के बच्चे हैं, अपनी ज़िद पे मर भी जाएंगे ताश के पत्तों से बनते हैं सियासत के मकां ये तुम्हारे घर हवाओं से बिखर भी जाएंगे कौन रोके, गर फना होने पतंगा आ गया एक बादल सूर्य से लेने को पंगा आ गया ये सियासतदां संभल जाएं कि अब इस...
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