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साहिब!

ये तुमने कौन से अंदाज़ से छुआ साहिब हुई है बेअसर हर शख़्स की दुआ साहिब सियार करते थे शब भर हुआ-हुआ साहिब उन्हें भगाने चला आया तेंदुआ साहिब हमारे चैन की हुंडी का हो गया सौदा ज़रा बताओ, मुनाफ़ा किसे हुआ साहिब ज़ुबां तो काट दी, रोटी न छीनना हमसे सुना है पेट भी देता है बद्दुआ...

बलात्कार को ओनर किलिंग बनाने की शुरुआत

सियासत किस तरह करती रही बर्ताव, मत भूलो कुरेदेंगे तुम्हारे ही बदन के घाव, मत भूलो तुम्हारी चीख़ से कुर्सी न हिल जाये मसीहा की अरे ओ हाथरस वालो, अभी उन्नाव मत भूलो ✍️ चिराग़...

क्या करोगे

कहाँ तक झूठ का पर्दा करोगे कभी तो झील में चेहरा करोगे बिछाकर जाल दाना डालता है तो क्या सय्याद का सजदा करोगे? कराहों को दबाया जा रहा है कहीं चीखें उठीं तो क्या करोगे सुना है भूख शर्मिंदा हुई है हवस को कब तलक पूरा करोगे अगर ज़िल्लत की आदत पड़ गई तो फिर ऐसी ज़िन्दगी का क्या...

लोकतंत्र का बकासुर

यह लोकतंत्र का सौंदर्य है कि जिस प्रदेश में चुनाव होते हैं, पूरे देश की चिंताएँ और चिंतन उसी प्रदेश पर केंद्रित हो जाते हैं। बाक़ी पूरे देश में सब कुछ अपने आप ठीक चल रहा होता है। हमारे संविधान निर्माताओं ने कितनी दूरदर्शिता के साथ यह व्यवस्था की होगी कि देश के तमाम...

देश का भला

“भाई! देश का भला कब होगा?” “जब आपके वोट से हम चुनाव जीतेंगे।” “भैया जी! चुनाव में जीत मुबारक़ हो। अब देश का भला कीजिये!” “अभी तो जीते हैं यार। चुनावों में रात-दिन काम किया है। साँस तो ले लें।” “सर जी! आपको चुनाव...
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