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साहित्यिक गोष्ठियों के वक्ता

आज एक साहित्यिक कार्यक्रम में अनेक वक्ताओं को सुनने का अवसर मिला तो पता चला कि आजकल मार्केट में अनेक प्रकार के वक्ता चल रहे हैं। कुछ परंपरागत वक्ता जो पुराने ढर्रे पर विषय का बाक़ायदा अध्ययन करके मंच पर आते हैं, वे आजकल मंच पर आ नहीं पाते हैं। इसके विपरीत वे लोग मंच की...

उम्मीद

कभी तो उम्मीद जी उठेगी कहीं तो मंज़र हसीं रहेगा कोई तो ऐसा भी वक़्त होगा कि जिसको हम पे यकीं रहेगा कुछेक लम्हों की बात सुनकर दुआ का दामन न छोड़ देना किसी चुभन की कसक से चिढ़कर हसीन गुंचे न तोड़ देना सुबह के माथे का ये पसीना सबा को छूकर महक उठेगा किसी तबस्सुम की बाँह थामे...
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