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चौरकर्म

फेसबुक के प्रयोक्ताओं को रोज़ कुछ अच्छा स्टेटस डालने का शौक तो चर्रा गया है, लेकिन इसके साथ अपनी सृजनात्मक क्षमता बढ़ाने की ललक नहीं जगी। ऐसे में दूसरों की प्रोफाइल से स्टेटस या स्टेटसांश कॉपी करके अपनी timeline पर पेस्ट करने की प्रवृत्ति बढ़ गयी है। इसमें कोई बुराई तो...

करवाचौथ

देख-देख कर सोचता, चाँद धरा से दूर। आज छतों पर आ गया, सारे जग का नूर।। करवे से जब अर्घ्य का, निभने लगा रिवाज़। चन्द्रलोक तक बज उठा, जलतरंग सा साज।। ✍️ चिराग़...

शरद पूर्णिमा

घर में आंगन न रहे, खीर के प्याले न रहे वो अंधेरे नहीं मिलते, वो उजाले न रहे चांद के पास अभी भी है ख़ज़ाना लेकिन वो लुटाए तो कहाँ, लूटने वाले न रहे ✍️ चिराग़...

पीड़ा जगनी थी

अन्तस् में पीड़ा जगनी थी, यह निर्धारित था ठेस अपेक्षा से लगनी थी, यह निर्धारित था रत्ना तो बस बानक भर थी, पूरे किस्से में तुलसी को मानस् रचनी थी, यह निर्धारित था ✍️ चिराग़...

हिन्दी भाषा

जिन ध्वनियों में सबसे पहले मैंने अपनों को पहचाना गड्ड-मड्ड होकर जो सबसे पहले कानों से टकराईं जिनमें लाड लड़ाकर माँ ने मुझे कलेजे से चिपकाया जिनमें बुआ बलैया लेकर अस्पताल में भी इतराई जिन ध्वनियों की हर स्वर-लहरी में अवलम्बन आशा का है उन ध्वनियों का इक-इक अक्षर केवल...
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