+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

करवाचौथ

देख-देख कर सोचता, चाँद धरा से दूर। आज छतों पर आ गया, सारे जग का नूर।। करवे से जब अर्घ्य का, निभने लगा रिवाज़। चन्द्रलोक तक बज उठा, जलतरंग सा साज।। ✍️ चिराग़...

शरद पूर्णिमा

घर में आंगन न रहे, खीर के प्याले न रहे वो अंधेरे नहीं मिलते, वो उजाले न रहे चांद के पास अभी भी है ख़ज़ाना लेकिन वो लुटाए तो कहाँ, लूटने वाले न रहे ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!