Blank Verse, Chirag Jain Writings, Mann To Gomukh Hai, Poetry
जाने ये कैसा बदरा है
बदरा के भीतर मदिरा है
जब छलकी तो सब झूम उठे
जैसे मृदंग से धूम उठे
पीपल ने छेड़ी तान अलग
बूंदों ने गाया गान अलग
पुरवा ने ऐसा रास रचा
बिजुरी ने जी भर नाच नचा
पंछी कलरव करते डोले
कच्चे स्वप्नों ने पर खोले
बचपन बौराया तब भू पर
हाथों से बूंदें छू-छू कर
ऐसा मेघों में रोर हुआ
इक उत्सव-सा हर ओर हुआ
धुल गई धरा, खुल गई पवन
पावन पावन है अंतर्मन
श्वासों में शीतलता आई
नयनों में चंचलता छाई
सब कष्ट ग्रीष्म के भूल गए
बागों में झूले झूल गए
जिस क्षण जल से संलिप्त हुई
वसुधा की तृष्णा तृप्त हुई
ऐसा मौसम का ज्वर आया
प्यासों में पानी भर आया
जाने ऐसा क्या कृत्य करा
सब कुछ लगता है हरा-हरा
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
सुना है बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री की कमर में दर्द हुआ।
पहली बार किसी वित्त मंत्री ने कमर तोड़ महँगाई को इतनी शिद्दत से महसूस किया है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Kohra Ghanaa Hai, Prose, Story
लाउड स्पीकर ने धर्मगुरु से पूछा- मैं तो साईं भी नहीं हूँ फिर मुझ पर विवाद क्यों?
धर्मगुरु बोले – क्योंकि तूने हमसे ऊंची आवाज़ में बात की।
लाउड स्पीकर झुक कर बोला – लेकिन मैंने तो आपकी ही आवाज़ बुलंद की हुजूर।
धर्मगुरु मुस्कुराए – ये समझ ले अब तू बेकार हो गया था। मीडिया की आवाज़ तुझसे ज़्यादा बुलंद है और मीडिया की मुंडेर तक पहुँचने के लिए तुझ पर खडा होना ज़रूरी था।
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
कौन कहता है नदी सागर को प्यारी हो गयी
ठौर ना पाया मिठासों में तो खारी हो गयी
टूटकर बिखरी कहीं जब भी, तभी झरना बना
पत्थरों ने गोद में लेकर कहा- ‘मरना मना’
सिर झुकाकर बढ़ चली पर चाल भारी हो गयी
ठौर ना पाया मिठासों में तो खारी हो गयी
घाट तक पहुँची, उलझकर रह गयी संसार में
गाँव-गलियों, मरघटों, नहरों, नलों, घर-बार में
उफ़, बिना मतलब ही खेतों की उधारी हो गयी
ठौर ना पाया मिठासों में तो खारी हो गयी
बांध ने बंदी बनाया, शहर ने शोषण किया
कर्मकाण्डों ने लहू लेकर भरण-पोषण किया
कारख़ानों ने छुआ, घातक बिमारी हो गयी
ठौर ना पाया मिठासों में तो खारी हो गयी
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Nazariya, Prose, Quotation
पहले शंकराचार्य जी ने बताया की साईं बाबा हिन्दू नहीं थे
फिर उलेमा साहब ने बताया कि साईं बाबा मुसलमान भी नहीं थे
……तो क्या समझा जाए? क्या साईं बाबा इन्सान थे!
✍️ चिराग़ जैन