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खारिज

एक ही पल में उभर आए कई सारे शिक़वे ढेर सारे गिले और फिर अगले ही पल मैंने ख़ुद-ब-ख़ुद लाजवाब कर दिया उन्हें अपने मन की अदालत में ….ऐसा नहीं था कि सचमुच बेबुनियाद थीं मेरी शिकायतें बल्कि बात दरअसल ये थी कि अदालत दिल की थी और दिल तुम्हारा…! ✍️ चिराग़...

पुरवा

एक बादल ने सरे-शाम भिगोई पुरवा सुब्ह फूलों से लिपट फूट के रोई पुरवा उसने ओढ़ा हुआ होगा कोई ग़म का बादल यूँ ही मदमस्त नहीं होती है कोई पुरवा हाय ये शहर बहुत रूखा हुआ जाता है अबकी गाँवों ने क्या सरसों नहीं बोई पुरवा तेरे दामन से क्यों उठती है महक ममता की छू के आई है क्या...

रौशनी

जब कोई शख़्स कोशिश करता है सूरज से आँख मिलाने की तो केवल आँखें ही नहीं चुंधियाती त्यौरियाँ भी पड़ जाती हैं माथे पर! ✍️ चिराग़...

करीने की बात

मरने की बात हो चुकी जीने की बात कर गाली-गलौज छोड़, करीने की बात कर सीने के नाप से ये सियासत न चलेगी अब आम आदमी के पसीने की बात कर ✍️ चिराग़...

प्रमाण

इससे पहले कि लोग तुम्हें कंधा दें, तुम उनको अपने जीवित होने का प्रमाण दे दो। ✍️ चिराग़ जैन
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